फैसलाः जज लो‍या की मौत स्वाभाविक थी, नहीं होगी जांच- सुप्रीम कोर्ट

Updated on: 21 February, 2019 12:02 AM

सुप्रीम कोर्ट ने विशेष सीबीआई जज बीएच लो‍या की मौत की स्वतंत्र जांच कराने से मना कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, एएम खानविलकर और डिवाइ चंद्रछुड़ की तीन जजों की पीठ ने यह फैसला आज (गुरुवार) को दिया है। 

पीठ ने कहा कि गेस्ट हाउस में लो‍या के साथ ठहरे चार अन्य जजों के बयान पर शक करना उचित नहीं है। ये सब जज अपने एक साथी की बेटी के विवाह में शामिल होने नागपुर गए थे। पीठ ने कहा इस मामले में पीआईएल याचिका के क्षेत्राधिकार का दुरुपयोग किया है।

ये याचिकाएं कॉंग्रेस नेता तहसीन पुनवाला, बॉम्बे लायर असोसिएशन और एक पत्रकार बीएसए लोने ने दायर की थी। लो‍या बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के मामले की सुनवाई कर रहे थे। उनकी 2014 में रहस्यमय हालात में नागपुर में मौत हो गयी थी। डॉक्टरों ने इसका कारण हार्ट अटैक बताया था।

सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों की सुनवाई कर 16 मार्च को फैसला सुरक्षित रख लिया था। सीजेआई ने यह केस पहले वरिष्ठता में 11 वें नंबर के जज अरूण मिश्रा को सौप दिया था। इसका सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठतम जजों ने अप्रत्याशित प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विरोध जताया था। इसके बाद सीजेआई ने यह मामला अपने पास बुला लिया था।

इस वजह से सीबीआई ने अपने पास मांगाया केस

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों द्वारा 12 जनवरी को किए गए प्रेस कांफ्रेंस की तात्कालिक वजह लोया केस की सुनवाई के लिए चुनी गई पीठ थी। हालांकि बाद में उस पीठ ने खुद को इस मामले से अलग कर लिया था और इसके बाद चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई थी।

कई दिनों तक चली हाई-वोल्टेज सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर कहा गया कि जज लोया की मौत की निष्पक्ष जांच जरूरी है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने कहा था कि जज लोया मामले में जो कुछ हो रहा है, वह परेशान करने वाला है। एक के बाद एक जज को सजा’ दी जा रही है। उन्होंने कहा पिछले दिनों जज लोया मामले को बांबे हाईकोर्ट को दूसरे जज के पास भेज दिया गया।

उन्होंने कहा था कि जज को इस मामले से इसलिए दूर कर दिया गया क्योंकि उन्होंने सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को आरोपमुक्त किए जाने के फैसले के खिलाफ अपील न दायर करने को लेकर सीबीआई से सवाल किया था। उन्होंने जस्टिस जयंत एम पटेल के तबादले की भी बात कहीं। जस्टिस पटेल ने इशरत जहां एनकाउंटर मामले की सीबीआई जांच का आदेश दिया था।
वकील प्रशांत भूषण भी कर चुके हैं SIT जांच की मांग

वकील से सामाजिक कार्यकर्ता बने प्रशांत भूषण ने सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ कांड की सुनवाई करने वाले न्यायाधीश बी एच लोया की मौत की न्यायिक जांच या विशेष जांच दल द्वारा जांच कराये जाने की मांग कर चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि लोया की मौत दिल का दौरा पड़ने से नहीं हुई है जैसा कि सरकारी अधिकारी दावा कर रहे हैं। कुछ दिनों पहले ही उन्होंने मांग की कि इसकी जांच होनी चाहिए।
        
उन्होंने कहा, ''मैं याचिका दायर करुंगा और लोया की मौत की न्यायिक जांच या एसआईटी जांच की मांग करुंगा। यदि यह दिल का दौरा नहीं था तब इस बात की जांच होनी चाहिए कि मौत की वजह क्या थी। उन्होंने दावा किया, ''सीबीआई यह जांच नहीं कर सकती है क्योंकि उस पर ढेर सारा सरकारी दबाव होता है। सरकार चाहती है कि इस मामले को तत्काल खारिज कर दिया जाए।
 
आपको बता दें कि हाईप्रोफोइल सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ कांड की सुनवाई कर रहे लोया की एक दिसंबर, 2014 को नागपुर में दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई जहां वह अपने एक सहयोगी की बेटी की शादी में गये थे। सुप्रीम कोर्ट फिलहाल उनकी मौत से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई कर रहा है।