इन 5 बड़े फैसलों से चर्चा में रहे मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्र

Updated on: 20 July, 2019 03:01 AM

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्र कई आदेशों को लेकर चर्चा में रहे। इनमें से कुछ फैसले उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रहते हुए सुनाए तो कुछ सुप्रीम कोर्ट में जज बनने के बाद दिए। उनके चर्चित फैसलों में दिल्ली के निर्भया गैंगरेप के दोषियों की फांसी की सजा बरकरार रखना और चाइल्ड पोर्नोग्राफी वाली वेबसाइट को बैन करना शामिल है। इसके अलावा केरल के सबरीमाला मंदिर के द्वार महिला श्रद्धालुओं के लिए खोलने के आदेश भी जस्टिस मिश्र ने ही दिए थे। उनके इन पांच सबसे बड़े फैसलों को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा हुई।


ये अहम फैसले दिए

1 - सिनेमा घरों में राष्ट्रगान अनिवार्य
जस्टिस दीपक मिश्र की अगुवाई वाली पीठ ने 30 नवंबर, 2016 को यह आदेश दिया कि पूरे देश के सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान चलाया जाए और इस दौरान सिनेमा हॉल में मौजूद तमाम लोग इसके सम्मान में खड़े होंगे। काफी विवाद के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार, 9 जनवरी, 2018 को एक अहम फैसले में सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाने की अनिवार्यता खत्म कर दी।


2- याकूब मेमन की फांसी बरकरार
मुंबई धमाकों में दोषी ठहराए गए याकूब मेमन ने फांसी से ठीक पहले सजा पर रोक लगाने की याचिका डाली थी। इस मामले में 29 जुलाई 2013 की रात को अदालत खुली और सुबह 5 बजे जस्टिस मिश्र ने फैसला सुनाया, ‘फांसी के आदेश पर रोक लगाना न्याय की खिल्ली उड़ाना होगा, याचिका रद्द की जाती है।’

3- एफआईआर की कॉपी 24 घंटे में वेबसाइट पर डालें

जस्टिस दीपक मिश्र और जस्टिस सी नगाप्पन की पीठ ने 7 सितंबर, 2016 को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश दिया कि किसी मामले में एफआईआर की कॉपी 24 घंटों के अंदर अपनी वेबसाइट पर अपलोड करें। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहते हुए भी जस्टिस मिश्र ने 6 दिसंबर, 2010 को दिल्ली पुलिस को ऐसे ही आदेश दिए थे, ताकि लोगों को बेवजह चक्कर न काटना पड़े।

4- पदोन्नति में आरक्षण पर रोक
उत्तर प्रदेश की मायावती सरकार की पदोन्नति में आरक्षण की नीति पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट में आया और शीर्ष अदालत ने भी फैसले को बरकरार रखा। 27 अप्रैल, 2012 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पदोन्नति से पहले सावधानी से जानकारियां जुटाई जाएं।


5- आपराधिक मानहानि की संवैधानिकता बरकरार
13 मई, 2016 को सुप्रीम कोर्ट की जिस पीठ ने आपराधिक मानहानि के प्रावधानों की संवैधानिकता को बरकरार रखने का आदेश सुनाया, उसमें जस्टिस दीपक मिश्र भी शामिल थे। यह फैसला भाजपा नेता सुब्रह्मण्यन स्वामी, राहुल गांधी, अर¨वद केजरीवाल व अन्य बनाम यूनियन के केस में सुनाया गया था। पीठ ने स्पष्ट किया था कि अभिव्यक्ति का अधिकार असीमित नहीं है।

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