जम्मू कश्मीर के अखनूर सेक्टर में पाक की गोलीबारी में शनिवार की रात शहीद

Updated on: 17 October, 2019 07:08 AM

देवरिया का एक लाल जम्मू कश्मीर के अखनूर सेक्टर में पाक की गोलीबारी में शनिवार की रात शहीद हो गया। उसके मौत की खबर बीएसएफ के कंट्रोल रूम की तरफ से परिजनों को रविवार की सुबह दी गई। जवान के मौत की खबर मिलते ही घर में कोहराम मच गया

देवरिया सदर कोतवाली क्षेत्र के बांसपार बैदा गांव के रहने वाले सत्य नारायण यादव बीएसएफ की 33 वीं बटालियन में एएसआई के पद पर तैनात थे। वर्तमान में उनकी तैनाती जम्मू कश्मीर के अखनूर सेक्टर में थी। शनिवार की देर रात पाकिस्तान की तरफ से क्रासबार्डर फायरिंग शुरू हो गई। इस दौरान रात करीब सवा एक बजे गोली लगने से सत्यनारायण शहीद हो गए। इनके साथ इनके साथी कांस्टेबल विजय कुमार भी शहीद हो गए। विजय कुमार उप्र के फतेहपुर के रहने वाले थे।

पत्नी को मिली निधन की सूचना
बीएसएफ के कंट्रोल रूम से सत्यनारायण की पत्नी सुशीला देवी को उनके निधन की खबर दी गई। रविवार की सुबह करीब पांच बजे सुशीला देवी के मोबाइल पर फोन आया। पति के निधन की खबर सुनते ही सुशीला देवी बदहवाश हो गई। सत्यनारायण के तीन बेटे शंभू, जितेंद्र और राजेश हैं।

खेती करते हैं पिता अयोध्या यादव
सत्यनारायण के पिता अयोध्या यादव खेती करते हैं। इनकी मां फूलबसिया देवी का निधन हो चुका है। सत्यनारायण का परिवार घर पर ही पिता के साथ रहता है। इनका बड़ा बेटा शंभू दिव्यांग है। घर की माली हालत सामान्य है।

शहीद सत्यनारायण के पिता बोले बेटे की शहादत पर गर्व


पिता अयोध्या को अपने बेटे सत्यनारायण यादव के शहीद पर फक्र है। कहते हैं कि एक नहीं उनके और बेटे होते तो उन्हें भी सीमा पर भेज देता। उन्होंने भारत सरकार से अपने बेटे की शहादत का बदला लेने की मांग की। कहा, ‘जब तक पाकिस्तान को उसकी भाषा में जवाब नहीं दिया जाएगा भारत के लाल शहीद होते रहेंगे। भारत सरकार को अब पाकिस्तान के खिलाफ खुला युद्ध करना चाहिए।’’

5 बहनों के एकलौते भाई थे शहीद सत्यनारायण
देश की सीमा की सुरक्षा करते हुए अपने जान की कुर्बानी देने वाले शहीद सत्यनारायण यादव पांच बहनों के इकलौते भाई थे। पिता की बुजुर्ग अवस्था देख वे इसी वर्ष वालेंटरी रिटायरमेंट लेकर घर आने की तैयारी में थे। उनके शहीद होने की खबर मिलते परिजन बदहवाश हो गए। बुजुर्ग पिता, पत्नी और बहनों की करुण क्रंदन से लोगों का कलेजा फट जा रहा था।

सदर कोतवाली क्षेत्र के बांसपार बैंदा गांव के रहने वाले सत्यनारायण के पिता अयोध्या यादव किसान हैं। उनकी 6 संतानों में वे इकलौते पुत्र थे। बहनों में इनसे बड़ी बसंती और मंती हैं जबकि शांति, सोनमति और पानमति छोटी है। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। घर की माली हालत ठीक नहीं थी ऐसे में हाई स्कूल की परीक्षा पास करते ही बीएसएएफ में भर्ती हो गए। पिता घर गृहस्थी संभालते थे तो बेटा देश की सीमाओं की रक्षा करने लगा। पिता की अवस्था अधिक हो गई तो गृहस्थी संभालना मुश्किल होने लगा ऐसे में सत्यनारायण इसी वर्ष रिटायर्ड होकर घर आने की तैयारी में थे। लेकिन इसी बीच पाक की नापाक गोलीबारी ने उनकी जान ले ली।

मार्च में15 दिन की छुट्टी पर आए थे सत्यनारायण
पट्टीदारी से भूमि विवाद की खबर मिलने पर सत्यनारायण इस वर्ष मार्च माह में 15 दिन की छुट्टी पर गांव आए थे। परिजनों का कहना है कि उनके काफी भागदौड़ करने के बावजूद विवाद हल नहीं हुआ, इसी बीच छुट्टी समाप्त हो जाने पर वापस सीमा पर चले गए।

 एसडीएम ने परिजनों को बंधाया ढांढ़स
शहीद सत्यनारायण के घर करीब डेढ़ बजे एसडीएम सदर राकेश कुमार सिंह और सीओ सीताराम पहुंचे। उन्होंने परिजनों को ढाढ़स बधाया। हालांकि एसडीएम को देख पिता अयोध्या ने नाराजगी भी जताई। इसके साथ ही उन्होंने शहीद के शहीद के पिता और बेटा राजेश से बात कर परिवार के बारे में जानकारी ली। इस दौरान देर से अधिकारियों के पहुंचने पर परिजनों ने नाराजगी जताई।

सोमवार की शाम तक पहुंचेगा पार्थिव शरीर

शहीद सत्यनारायण का पार्थिव शरीर सोमवार की देर शाम तक घर पहुंचेगा। शहीद के दमाद विकास यादव ने बीएसएफ के कर्नल से बात की, जिस पर कर्नल ने उन्हें यह जानकारी दी। पार्थिव शरीर के आने को लेकर जिला प्रशासन ने भी तैयारी शुरू कर दी है।

शहीद के दो बेटे हैं बाहर
सत्यनारायण यादव के तीन बेटे हैं। इसमें बड़ा बेटा शंभू दिल्ली गया है। जबकि चार दिन पहले ही जितेन्द्र यादव कमाने के लिए सूरत गया है। छोटा बेटा राजेश यादव हाई स्कूल का परीक्षा दिया था। वह शनिवार की रात में अपने बुआ के घर गया हुआ था। पिता के शहीद होने की सूचना पर बेटा शंभू और जितेन्द्र गांव के लिए चल दिए हैं।

सवांदाता इम्तियाज़ अंसारी
देवरिया

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