असम में महसूस किए गए भूकंप के झटके, घर से बाहर निकले लोग

Updated on: 20 November, 2019 03:24 AM

असम में सोमवार को मध्यम स्तर के भूकंप के झटके महसूस किये गये। मौसम विभाग के मुताबिक सुबह 10.23 बजे आये भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.9 मापी गयी और इसका केंद्र असम के धींग में रहा। राजधानी गुवाहाटी में भूकंप का झटका महसूस होने पर अफरातफरी मच गयी और लोग घरों से बाहर खुले स्थानों की ओर निकल आए। भूकंप से किसी प्रकार के जानमाल के नुकसान की रिपोर्ट नहीं है।

जानें, कैसे भूंकप की तीव्रता मापी जाती है :

भूकंप मापन की प्रणाली
आपने गौर किया होगा कि भूकंप की तीव्रता के बारे में उसका मापन रिक्टर पैमाने पर किया जाता है। एक और पैमाना मरकेली है। आइए पहले जाने कि क्या है रिक्टर पैमाना।

रिक्टर पैमाना
रिक्टर स्केल भूकंप की तीव्रता मापने का एक गणितीय पैमाना है। इसे रिक्टर मैग्नीट्यूड टेस्ट स्केल कहा जाता है। यह एक लघुगुणक आधारित स्केल होता है, जो भूकंप की तरंगों की तीव्रता को मापता है। भूकंप की तरंगों को रिक्टर स्केल 1 से 9 तक के अपने मापक पैमाने के आधार पर मापता है। 9 कोई अंतिम बिंदु नहीं है, बल्कि उससे ऊपर भी यह जा सकता है, लेकिन आज तक इससे ऊपर का भूकंप नहीं आया है। रिक्टर पैमाने को सन 1935 में कैलिफॉर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलाजी में कार्यरत वैज्ञानिक चार्ल्स रिक्टर ने बेनो गुटेनबर्ग के सहयोग से खोजा था।

मापन का आधार
इस स्केल के अंतर्गत प्रति स्केल भूकंप की तीव्रता 10 गुणा बढ़ जाती है और भूकंप के दौरान जो ऊर्जा निकलती है वह प्रति स्केल 32 गुणा बढ़ जाती है। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि 3 रिक्टर स्केल पर भूकंप की जो तीव्रता थी, वह 4 स्केल पर 3 रिक्टर स्केल का 10 गुणा बढ़ जाएगी। इसको एक उदाहरण के द्वारा समझ सकते हैं। रिक्टर स्केल पर भूकंप की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 60 लाख टन विस्फोटक(TNT) जितना विनाश कर सकता है उतना ही 8 रिक्टर स्केल तीव्रता का भूकंप कर सकता है।

मरकेली स्केल
रिक्टर स्केल के अलावा मरकेली स्केल पर भी भूकंप को मापा जाता है। इसमें भूकंप को उसकी तीव्रता की बजाए उसकी ताकत के आधार पर मापते हैं। पर इसको रिक्टर के मुकाबले कम वैज्ञानिक माना जाता है, क्योंकि भूकंप की ताकत को लेकर लोगों का अनुभव अलग-अलग हो सकता है। साथ ही भूकंप के कारण होने वाले नुकसान के लिए कई कारण जिम्मेवार हो सकते हैं, जैसे घरों की खराब बनावट, खराब संरचना, भूमि का प्रकार, जनसंख्या की बसावट आदि।

भूकंप की तीव्रता
भूकंप की तीव्रता का अंदाजा उसके केंद्र से दूर उससे आहत हुए लोगों पर पड़े असर से लगाया जाता है।  अगर भूकंप की गहराई उथली हो तो इससे बाहर निकलने वाली ऊर्जा सतह के काफी करीब थी, जिसने तबाही ज्यादा बढ़ा दी। वहीं जो भूकंप गहरे होते हैं वह जमीन को ज्यादा नहीं हिलाते। पाकिस्तान में आए भूकंप का केंद्र 84 किमी नीचे था, इसलिए काफी तीव्रता का भूकंप होने के बाद भी इससे अधिक नुकसान नहीं हुआ।

विभिन्न रिक्टर स्केलों पर भूकंप
- रिक्टर स्केल के अनुसार 2.0 की तीव्रता से कम वाले भूकंपीय झटकों की संख्या रोजाना लगभग आठ हजार होती है जो इंसान को महसूस ही नहीं होते।

- 2.0 से लेकर 2.9 की तीव्रता वाले लगभग एक हजार झटके रोजाना दर्ज किए जाते हैं, लेकिन आम तौर पर ये भी महसूस नहीं होते।

- रिक्टर स्केल पर 3.0 से लेकर 3.9 की तीव्रता वाले भूकंपीय झटके साल में लगभग 49 हजार बार दर्ज किए जाते हैं, जो अक्सर महसूस नहीं होते, लेकिन कभी-कभार ये नुकसान कर देते हैं।

- 4.0 से 4.9 की तीव्रता वाले भूकंप साल में लगभग 6200 बार दर्ज किए जाते हैं। इस वेग वाले भूकंप से थरथराहट महसूस होती है और कई बार नुकसान भी हो जाता है।

- 5.0 से 5.9 तक का भूकंप एक छोटे क्षेत्र में स्थित कमजोर मकानों को जबर्दस्त नुकसान पहुंचाता है जो साल में लगभग 800 बार महसूस होता है।

- 6.0 से 6.9 तक की तीव्रता वाला भूकंप साल में लगभग 120 बार दर्ज किया जाता है और यह 160 किलोमीटर तक के दायरे में काफी घातक साबित हो सकता है।

- 7.0 से लेकर 7.9 तक की तीव्रता का भूकंप एक बड़े क्षेत्र में भारी तबाही मचा सकता है और जो एक साल में लगभग 18 बार दर्ज किया जाता है।

- रिक्टर स्केल पर 8.0 से लेकर 8.9 तक की तीव्रता वाला भूकंपीय झटका सैकड़ों किलोमीटर के क्षेत्र में भीषण तबाही मचा सकता है जो साल में एकाध बार महसूस होता है।

- 9.0 से लेकर 9.9 तक के पैमाने का भूकंप हजारों किलोमीटर के क्षेत्र में तबाही मचा सकता है, जो 20 साल में लगभग एक बार आता है। दूसरी ओर 10.0 या इससे अधिक का भूकंप आज तक महसूस नहीं किया गया।

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