बढ़ती गर्मी से उत्तर भारत के कई हिस्सों में बढ़ सकता है बिजली संकट

Updated on: 19 June, 2019 07:19 PM

भीषण गर्मी में बिजली की मांग बढ़ने के साथ कई थर्मल पावर स्टेशन में कोयला का संकट बढ़ सकता है। करीब एक दर्जन थर्मल पावर स्टेशन के पास सात दिन से कम का कोयला है। बिजली की मांग बढ़ती है, तो कोयला की कमी के चलते उत्तर भारत में बिजली संकट गहरा सकता है। यह प्लांट 12000 मेगावाट से अधिक उत्पादन करते हैं। यह कुल उत्पादन का छह फीसदी है।

केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) के मुताबिक, देश में 12 पावर प्लांट में कोयला की स्थिति चिंताजनक है। इनमें से सात प्लांट में जरूरत के मुताबिक सात दिन से कम का कोयला उपलब्ध है। वहीं, पांच प्लांट में चार दिन से कम की जरूरत का कोयला मौजूद है। इसके साथ 47 थर्मल पावर स्टेशन ऐसे हैं, जहां सात दिन से कम का कोयला है, पर एनटीपीसी और कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) आपूर्ति की स्थिति को बरकरार रखे हुए है।

सीईए की 19 जून की रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली में बदरपुर थर्मल पावर, यूपी में अनपरा, ललितपुर, प्रयागराज और रोजा पावर प्लांट, बिहार में नबी नगर और झारखंड में कोडरमा और बोकारो पावर प्लांट में भी सात दिन या उससे कम की जरूरत का कोयला है। पर कोयला मुहैया कराने वाली कंपनियां लगातार ईंधन उपलब्ध करा रही है, इसलिए सभी 47 पावर स्टेशन को क्रिटिकल या सुपर क्रिटिकल की श्रेणी से बाहर रखा गया है।

यह पावर स्टेशन करीब 58,000 मेगावाट बिजली का उत्पादन करते हैं। यह कोयला से बिजली उत्पादन का 48 फीसदी है। ऐसे में इन पावर प्लांट में कोयला की आपूर्ति गड़बड़ाती है, तो बिजली संकट गहरा सकता है। क्योंकि, इनमें आधे से ज्यादा पावर प्लांट उत्तर भारत के हैं। मानसून दूर है। गर्मी के चलते बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है।

क्रिटिकल पावर स्टेशन :

हरियाणा में यमुना नगर, राजीव गांधी पावर स्टेशन, छत्तीसगढ़ में नवापारा, गुजरात में साबरमती, वनाबोरी, मध्य प्रदेश में सिवनी और महाराष्ट्र के तिरोरा। इन सातों पावर प्लांट के पास सात दिन से कम का कोयला उपलब्ध है।

सुपर क्रिटिकल पावर स्टेशन :

-हरियाणा में पानीपत, राजस्थान में छाबरा, यूपी में हरदुआगंज, महाराष्ट्र में धानू और वारोरा प्लांट शामिल है। इन सभी पांच प्लांट के पास जरूरत के हिसाब से चार दिन से कम का कोयला मौजूद है।
- देश में कुल बिजली उत्पादन तीन लाख 44 हजार मेगावाट है। इनमें से कोयला से बिजली का उत्पादन एक लाख 96 हजार यानी कुल उत्पादन का 57 प्रतिशत है।
- सीईए की 19 जून की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तरी क्षेत्र में एक लाख मिलियन यूनिट उत्पादन का लक्ष्य था, पर उत्पादन 92 हजार 787 मिलियन यूनिट रहा। यह लक्ष्य से करीब साढ़े फीसदी कम है। (उत्तरी क्षेत्र के राज्य- दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड)
-  1 अप्रैल से अब तक 71 लाख 65 हजार मिलियन यूनिट बिजली का लक्ष्य था, पर उत्पादन कुल 68 लाख 98 हजार मिलियन यूनिट रहा। यह लक्ष्य से दो लाख 66 हजार मिलियन यूनिट कम है।

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