यूपी के शहरों में चलेंगी देश की सबसे ज्यादा मेट्रो

Updated on: 19 August, 2019 01:43 AM

कानपुर, मेरठ और आगरा में मेट्रो को मंजूरी के साथ यूपी देश का ऐसा राज्य बन गया है जिसके सबसे ज्यादा शहरों में मेट्रो चलेंगी। अब तक केंद्र ने छह शहरों में मेट्रो चलाने की मंजूरी दे दी है जबकि तीन शहरों इलाहाबाद, वाराणसी और गोरखपुर में भी मेट्रो चलाने का आधारभूत काम जोरों पर है। कानपुर, मेरठ और आगरा में यह परियोजना 43 हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे और इसे वर्ष 2024 में पूरा किया जा सकेगा।

देश के नक्शे में यूपी मेट्रो सबसे ऊपर
यूपी देश का पहला ऐसा राज्य बना गया है जहां नौ शहरों में मेट्रो रेल का खाका खींचा गया। लखनऊ, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद में मेट्रो रेल चलने लगी है। लखनऊ में पहला चरण पूरा हो चुका है और 8.5 किमी में मेट्रो चल रही है। दूसरा ‌व अंतिम चरण 2019 में पूरा होगा। गाजियाबाद में मेट्रो का दिलशाद गार्डेंन से नया बस अड्डा गाजियाबाद तक 9.41 किमी का विस्तार हो रहा है।

2024 के लोकसभा चुनाव तक काम पूरा करना है लक्ष्य

मेट्रो रेल कारपोरेशन जल्द खोलेगा रोजगार के द्वार
राज्य सरकार मेट्रो रेल कारपोरेशन का भी गठन कर देगी। इसी के साथ मेट्रो सेक्टर में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के द्वार खुलेंगे। मोटे अनुमान के मुताबिक 2000 से ज्यादा युवाओं, तकनीकी विशेषज्ञों को नौकरी मिलना तय है। इस पर कैबिनेट में फैसला हो चुका है। जल्द ही अधिसूचना जारी की जाएगी।

गोरखपुर, इलाहाबाद व वाराणसी की डीपीआर जल्द
अब गोरखपुर, इलाहाबाद व वाराणसी में मेट्रो चलाने के लिए डीपीआर नए सिरे से बनाया जा रहा है। इसे भी राज्य सरकार जल्द मंजूरी देगी और बाद में केंद्र को भेजा जाएगा। इन शहरों में मेट्रों की शुरुआत पूर्वांचल में विकास की नई रफ्तार को जन्म देगी। इनमें से दो वाराणसी जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का निर्वाचन क्षेत्र है तो वहीं गोरखपुर से यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चुनाव लड़ते हैं। सियासी नजरिये से इन दोनों शहरों में मेट्रो का चलना अहम होगा। वहीं इलाहाबाद धार्मिक नगरी के रूप में महत्वपूर्ण है। यहां कुंभ आदि के दौरान मेट्रो के जरिए विकास का नया खाका खींचने की कोशिश हो रही है।

शहरी ट्रांसपोर्ट की बेहतर सुविधा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के शहरों में बेहतर ट्रांसपोर्ट की सुविधा देना चाहते हैं। इसमें मेट्रो रेल के अलावा सिटी बसों की सुविधा देने की दिशा में काम चल रहा है। प्रदेश के नौ शहरों में जहां मेट्रो चलाने पर काम चल रहा है, वहीं पांच शहरों लखनऊ, इलाहाबाद, वाराणसी, आगरा व गाजियाबाद में इलेक्ट्रानिक बसें चलाने की तैयारी है। इसका मकसद शहरी लोगों को ट्रांसपोर्ट की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना है।

लखनऊ मेट्रो
अमौसी से मुंशी पुलिस तक    23 किमी
कुल लागत        6880 करोड़

कानपुर मेट्रो
आईआईटी से नौबस्ता व कृषि विवि से बर्रा- 8----32.38 किमी
कुल लागत        18307 करोड़

आगरा मेट्रो
सिंकंदरा से ताज ईस्ट गेट व कालिंदी विहार-------30किमी
कुल लागत    13910 करोड़

मेरठ मेट्रो
परतापुर से मोदीपुरम व जागृति विहार एक्सटेंशन तक----32.95 किमी
कुल लागत    14401 करोड़

प्रमुख सचिव आवास नितिन रमेश गोकर्ण का कहना है कि केंद्र ने कानपुर, मेरठ और आगरा में मेट्रों को मंजूरी दे दी है। गोरखपुर, वाराणसी और इलाहाबाद में मेट्रो रेल चलाने के लिए डीपीआर बनाने का काम चल रहा है। कैबिनेट से मंजूरी के बाद इसे जल्द ही केंद्र को भेज जाएगा। राज्य सरकार यूपी में मेट्रो रेल चलाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है।

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