हाई कोर्टों में एडहॉक जज नियुक्त न होने पर सुप्रीम कोर्ट खफा

Updated on: 13 November, 2019 11:34 AM

उच्च न्यायालयों में एडहॉक जजों की नियुक्तियां न करने पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार पर नाराजगी जाहिर की है। जस्टिस आर.एफ. नरीमन और इंदु मल्होत्रा की पीठ ने केंद्र सरकार से कहा कि हाईकोर्ट में तमाम आपराधिक अपीलें लंबित पड़ी हैं। कई अपीलें 16 से 20 वर्ष तक पुरानी हैं। क्या आपको पता है कि इसकी वजह से कितने लोगों को जेलों में सड़ना पड़ रहा है।

पीठ ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस टी.एस. ठाकुर तथा हाईकोर्टों के मुख्य न्यायाधीशों के प्रस्ताव का हवाला दिया, जिसमें रिटायर जजों को एडहॉक जज के रूप में नियुक्त करने का फैसला किया गया था। पीठ ने कहा इस अदालत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने सभी राज्यों के मुख्य न्यायाधीशों के साथ मिलकर यह प्रस्ताव किया था कि लंबित मामलों के बोझ से निपटने के लिए उच्च अदालतों में रिटायर जजों को एडहॉक जज नियुक्त किया जाएगा। हम जानना चाहते हैं कि केंद्र सरकार ने इस बारे में क्या कदम उठाए हैं।

इसके साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार और सभी राज्यों को नोटिस जारी कर कहा कि वे आपराधिक मामलों की लंबित अपीलों के त्वरित निपटारे के लिए एडहॉक जजों की नियुक्तियों को लेकर उठाए गए कदमों की जानकारी दें।

जस्टिस नरीमन ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों का लंबित मामलों के प्रति यह ढीला रवैया बेहद चौंकाने वाला है। तमाम जज हैं जो 62 वर्ष की उम्र में रिटायर होने के बाद खाली बैठे हैं। उन्हें इस्तेमाल क्यों नहीं किया जा रहा है। सरकार के इस रवैये से नागरिकों को कष्ट सहना पड़ रहा है। हम सरकार और राज्यों के इस रुख से खुश नहीं है। पीठ ने एएसजी पिंकी आनंद से कहा कि इस मामले को वह स्वयं देखें।

देश के 24 हाईकोर्ट में 400 से ज्यादा रिक्तियां हैं और लाखों आपराधिक अपीलें लंबित हैं। संविधान के अनुच्छेद 224ए के तहत रिटायर जजों को हाईकोर्ट में एडहॉक जज नियुक्त किया जा सकता है।

जजों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने पर विचार
सरकार यह भी विचार कर रही है कि हाईकोर्ट के जजों की रिटायरमेंट आयु 62 से बढ़ाकर 65 कर दी जाए। वहीं सुप्रीम कोर्ट के जजों की आयु बढ़ाकर 65 से 67 वर्ष करने पर विचार हो रहा है। इसके लिए संविधान में संशोधन करना पड़ेगा। इस बारे में सरकार संसद के मानसून सत्र में ही एक विधेयक लाने पर विचार कर रही है।

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