केंद्र सरकार अब अपने बाकी बचे कार्यकाल में और अध्यादेश नहीं लाएगी

Updated on: 20 July, 2019 03:05 AM

केंद्र सरकार अपने बाकी बचे कार्यकाल में नए अध्यादेश लाने से परहेज करेगी। नए कानून विधेयक के जरिये ही बनाए जाएंगे और यदि विपक्ष उन्हें संसद में पारित करने में सहयोग नहीं करता है तो इसे विपक्ष के खिलाफ बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया जाएगा। उच्च पदस्थ सूत्रों ने यह जानकारी दी है।

सूत्रों का दावा है कि इसी के चलते हाल में तीन तलाक और अनुसुचित जाति-जनजाति आरक्षण मामले पर अध्यादेश लाने का विचार टाल दिया गया। एनडीए सरकार के चार साल के कार्यकाल में अब तक 39 अध्यादेश आए हैं। इनमें से कुछ अध्यादेश ऐसे हैं जो एक बार से अधिक मर्तबा निकले हैं। फिर भी यह संख्या पूर्ववर्ती सरकारों से ज्यादा है।
लेकिन तीन तलाक और आरक्षण जैसे मुद्दों पर सरकार अध्यादेश लाकर विपक्ष को आसानी से बचकर नहीं निकलने देना चाहती है। तीन तलाक का मुद्दा संसद में लटका हुआ है। इसी प्रकार अजा-जजा आरक्षण के मामले भी सरकार के विचाराधीन हैं जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने उत्पीड़न के मामलों में गिरफ्तारी पर रोक लगा रखी है। दूसरा मामला प्रोन्नति से जुड़ा हुआ है। इन मामलों में सरकार कानून बनाने की इच्छुक है।

सरकार के भरोसेमंद सूत्रों का कहना है कि यह तय हुआ है कि इन मुद्दों पर अब अध्यादेश नहीं लाया जाए। बल्कि लंबित विधेयक या नए विधेयक लाकर ही प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

यदि विधेयक पारित नहीं होते हैं तो ठीकरा विपक्ष के सिर फोड़ा जाए। यह नीति सबसे पहले इसी सत्र में तीन तलाक कानून के मामले में भी अपनाई जाएगी। इसे पारित कराने की कोशिश की जाएगी। नहीं हुआ तो अगले सत्र में फिर लाया जाएगा। इसी प्रकार यदि आरक्षण मामले का समाधान कोर्ट से नहीं निकलता है तो उसके लिए भी विधेयक लाया जाएगा।

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