भीमा कोरेगांव: सुप्रीम कोर्ट का अलग जांच दल बनाने से इनकार, जानिए फैसले की 10 खास बातें

Updated on: 20 October, 2019 05:51 PM
भीमा कोरेगांव में सुनवाई करते हुए शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने बहुमत से फैसला देते हुए गिरफ्तार आरोपियों की नजरबंदी चार हफ्ते के लिए बढ़ा दी। इसके साथ ही सर्वोच्च अदालत ने इस केस में गिरफ्तार वरवरा राव, अरूण फरेरा, वर्नन गोनसल्वेज, सुधा भारद्वाज और गौतम नवलखा को लेकर कहा कि अभियुक्त खुद यह फैसला नहीं कर सकते की कौन सी एजेंसी जांच करें। आइये जानते है भीमा-कोरेगांव पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की दस बड़ी बातें भीमा कोरेगांव केस में गिरफ्तार पांच कार्यकर्ता वरवरा राव, अरूण फरेरा, वर्नन गोनसल्वेज, सुधा भारद्वाज और गौतम नवलखा केस में सुप्रीम कोर्ट का दखल से इनकार। सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों का बहुमत से फैसला भीमा कोरेगांव केस में गिरफ्तारी पर फैसला पढ़ते हुए जस्टिस एएम खांडविलकर ने कहा- अभियुक्त खुद यह तय नहीं कर सकते की कौन सी एजेंसी जांच करे। आरोपी कार्यकर्ताओं की नजरबंदी बढ़ी, अगले चार हफ्ते तक घर में ही रहेंगे नजबरबंद सर्वोच्च अदालत ने कहा कि भीमा कोरेगांव में गिरफ्तार कार्यकर्ता राहत के लिए ट्रायल कोर्ट जा सकते हैं। इस केस में विशेष जांच दल के गठन से सर्वोच्च अदालत का इनकार शीर्ष अदालतन पुणे पुलिस से कहा कि वह अपनी जांच को आगे बढ़ाएं फैसले पर जस्टिस चंद्रचूड़ की राय अलग रही सुप्रीम कोर्ट ने भीमा कोरेगांव में गिरफ्तार पांचों के मामले में दखल देने से किया इनकार ये मामला सिर्फ असहमति पर गिरफ्तारी का नहीं है।
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