भारत-नेपाल सीमा तक सड़क बनाएगा चीन, रणनीतिक घेरेबंदी की कोशिश

Updated on: 19 November, 2019 06:48 AM
भारत की चौतरफा घेराबंदी करने के लिहाज से चीन रणनीतिक परियोजनाओं को नेपाल के साथ मिलकर आगे बढ़ा रहा है। इसका सीधा असर भारत के रणनीतिक हितों पर पड़ सकता है। ताजा प्रस्ताव के मुताबिक चीन-नेपाल सीमा पर लापचा से लेकर भारत-नेपाल सीमा पर बिर्तामोड तक वन बेल्ट वन रोड परियोजना के तहत सड़क बनाएगा। पांच साल में पूरी होने वाली इस सड़क से चीन और भारत सीमा के बीच का सफर महज चार घंटे में तय होगा। इसके अलावा नेपाल में चीन की मदद से आयुध फैक्टरी के निर्माण का भी प्रस्ताव है। इन योजनाओं पर भारतीय एजेंसियों ने अपनी चिंता जाहिर की है। नेपाल में भारत विरोधी प्रचार के लिए चीन की फंडिंग की भी पुख्ता जानकारी भारतीय एजेंसियों को मिली है। समिति में शामिल लोगों के नाम भी एजेंसियों ने उजागर किए हैं। विशेषज्ञ टिप्पणी नेपाल में पैठ बना रहा चीन : पूर्व एडीजी बीएसएफ के पूर्व एडीजी पीके मिश्र ने कहा चीन लगातार भारत की रणनीतिक घेरेबंदी कर रहा है। उन्होंने अपने व्यापारिक हित के अलावा सैन्य रणनीतिक संबंधों पर खास ध्यान दिया है। वे एशिया में भारत को बढ़ने नहीं देना चाहते। श्रीलंका और मालदीव में उन्होंने यही किया। नेपाल में भी उन्होंने पैठ बनाई है। अगर भारत-नेपाल सीमा तक चीन सड़क बना लेता है तो यह भारत के लिए रणनीतिक रूप से बड़ी चुनौती होगा। भारत को नेपाल से मिलकर काउंटर रणनीति पर काम करना होगा। चीन की मदद से आयुध फैक्टरी भी बनेगी सूत्रों ने कहा, नेपाल आयुध फैक्टरी को लेकर चीन की मदद हासिल करने की मंशा जाहिर कर चुका है। नेपाल ने कहा है कि वह अपने यहां हथियार और विशिष्ट किस्म की वर्दी का निर्माण करना चाहता है। लुम्बिनी में मोनो रेल परियोजना को लेकर भी दोनों देशों के बीच जल्द बैठक होने वाली है। डेढ़ सौ मिलियन चीनी युआन की मदद पर नजर नेपाल के रक्षामंत्री ईश्वर पोखरेल 24 से 28 अक्तूबर तक चीन की यात्रा पर थे। इस दौरान चीन की तरफ से सैन्य मदद के तौर पर 150 मिलियन चीनी युआन की सहायता को लेकर समझौता हुआ था। यह मदद आपदा प्रबंधन की तैयारी, मानवता और आपदा सहायता से जुड़े उपकरण खरीदने को दिए गए थे। भारतीय एजेंसियों को यह राशि किसी और मकसद से खर्च होने की आशंका है।
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