दिल्ली : आतंकी कर रहे थे ऑनलाइन भर्ती, इन कॉलेज के छात्रों पर थी नजर

Updated on: 21 September, 2019 06:59 AM
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और जम्मू कश्मीर पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप की संयुक्त टीम के हत्थे चढ़े आतंकियों ने यह सनसनीखेज खुलासा किया है कि राजधानी को दहलाने के लिए इनका संगठन हथियार जमा कर रहा था। साथ ही, आईएसआईएस आतंकियों की भर्ती को ऑनलाइन अभियान चला रहा था। सूत्रों के मुताबिक, पुलिस के हत्थे चढ़ा आतंकी और जामिया का छात्र जम्मू-कश्मीर के वाथूरा बुदगाम निवासी हैरिस मुश्ताक खान कुछ इलाकों की रेकी करने के लिए आया भी था। चूंकि वह जामिया का छात्र था और उसे दिल्ली की भौगोलिक स्थिति के बारे में अच्छी जानकारी थी। इस कारण दिल्ली में तबाही मचाने के लिए संगठन प्रमुख आदिल ठोकर ने उसके जरिये ही दिल्ली से जुड़ी जानकारी जुटा रहा था। इतना ही नहीं, उसने कुछ संदिग्धों दिल्ली भेजा भी था जिसके बारे में स्पेशल सेल जानकारी जुटा रही है। वहीं, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पूरे नेटवर्क को खंगालने के लिए छह अन्य संदिग्धों को हिरासत में भी ले रखा है और उनसे पूछताछ की जा रही है। माना जा रहा है कि इस नेटवर्क से जुड़े दिल्ली और पश्चिमी यूपी के जुड़े कुछ और गुर्गों का नाम अगले कुछ दिनों में सामने आ सकता है। ऑनलाइन भर्ती चल रही : स्पेशल सेल के मुताबिक आईएसआईएस इस वक्त ऑनलाइन भर्ती कर रहा था। भर्ती के लिए खासतौर से उन नौजवानों पर उसकी नजर है जो मूलरूप से जम्मू-कश्मीर हैं और वे दिल्ली और पश्चिमी यूपी के किसी न किसी संस्थान जुड़कर पढ़ाई कर रहे हैं। संगठन ने अपने इस अभियान के जरिऐ ही जामिया मिलिया के पीजी छात्र कश्मीरी मूल के हैरिस और ग्रेटर नोएडा के शारदा यूनिवर्सिटी के कश्मीरी मूल के छात्र एहतेशाम विलाल को इस साल संगठन में शामिल कर लिया था। स्पेशल सेल की मानें इनकी भर्ती यूनिट के लोगों की नजर करीब दर्जन भर अन्य लोग भी थी। ऐसे करते थे छात्रों को टारगेट: स्पेशल सेल के डीसीपी ने बताया कि आईएसआईएस की भर्ती यूनिट के लोग ये सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर खासतौर पर कश्मीरी मूल के छात्रों से दोस्ती कर यह देखते थे कि किनमें में दहशतगर्दों को लेकर सहानुभूति है। इसके बाद उनसे नजदीकी बढ़ाई जाती थी और फिर उन्हें आतंकियों के प्रति सहानु़भूति पैदा करने वाले साहित्य, वीडियो और ऑडियो भेजे जाते थे। फिर उनके अंदर सुरक्षाबलों के बीच दहशत फैलाने की आग पैदा कर उन्हें संगठन से जोड़ लिया जाता था। हैरिस मुश्ताक खान हैरिस मूल रूप से जम्मू कश्मीर के शाहपोरा वाथूरा के बुदगाम का रहने वाला है। वर्ष 1994 में जन्म लेने वाले हैरिस ने श्रीनगर के करन नगर सीनियर सेकेंड्री स्कूल से पढ़ाई की थी। इसके बाद वह दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया आ गया। यहां से ग्रेजुएशन करने के बाद इंटरनेशनल स्टडीज में पीजी में दाखिल लिया था। हालांकि, उसने पढ़ाई छोड़ दी और आईएसआईएस ज्वाइन कर लिया। (सांकेतिक नाम: अबु बकर) आसिफ सुहैल नदाफ आसिफ सुहैल नदाफ जम्मू-कश्मीर के रेनावारी इलाके का रहने वाला है। वर्ष 1996 में जन्म लेने वाले आसिफ वहीं के मुस्लिम स्टेडर्ड स्कूल से पढ़ाई की। हालांकि, 10 वीं तक पढ़ाई करने के बाद उसने पढ़ाई छोड़ दी और एक गारमेंट्स शॉप में काम करने लगा। आसिफ भी आसिफ नाजिर डार के जरिए ही आईएसआईएस में जुड़ा था। (सांकेतित नाम: करीम) ताहिर अली खान ताहिर अली खान जम्मू कश्मीर के ट्राल इलाके के चंद्रीग्राम का निवासी है। वर्ष 1995 में जन्म लेने वाले ताहिर ने सरकारी मीडिल स्कूल चंदेरगाम से पढ़ाई की। इसके बाद हायर सेकेंड्री स्कूल नोपोरा, ट्राल से उसने इंटर 12वीं की पढ़ाई की। इसके बाद उसने आगे की पढ़ाई के लिए भी दाखिला लिया, लेकिन बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी। वह आसिफ नाजिर डार के जरिए आईएसआईएस में शामिल हो गया। (सांकेतिक नाम: मुसैब) आदिल ठोकर आईएसआईएस का प्रमुख स्पेशल सेल के मुताबिक, आदिल ठोकर जम्मू-कश्मीर में आईएसआईएस का प्रमुख है। वह आईएसआईएस से जुड़ने वाले नौजवानों को पनाह देता है और उनके खाने-पीने का प्रबंध करते हुए उन्हें हथियार चलाने की ट्रेनिंग दिलवाता है। पाकिस्तान में बैठा आईएसआईएस का एक शख्स आदिल को निर्देश देता है। यह खुलासा पकड़े गए आतंकियों ने किया है। उनके निशाने पर इस वक्त दिल्ली-एनसीआर व पश्चिमी यूपी के कई हिस्से हैं, जहां वह बड़े पैमाने पर तबाही फैलाना चाहता है। ‘थेरेमा’ व ‘ट्रिलियन’ चैट एप पर जुड़े डीसीपी के मुताबिक, आईएसआईएस के इस मॉड्यूल के आतंकी आपस में सूचनाओं का आदान-प्रदान करने के लिए मुख्य रूप से ‘थेरेमा’ और ‘ट्रिलियन’ एप्लीकेशन का इस्तेमाल करते हैं। इस कारण सुरक्षाकर्मियों को इनकी भनक तक नहीं लगती है। क्या है ‘ट्रिलियन’ चैट एप्लीकेशन ‘ट्रिलियन’ मल्टी प्रोटोकॉल इंटरनेट मैसेजिंग एप्लीकेशन है। इसका इस्तेमाल आईएसआईएस ही नहीं दूसरे आतंकी संगठन भी करते हैं। इसका इस्तेमाल पहली बार सीरिया में भारतीय युवाओं को जोड़ने में जुटी आईएसआईएस की एक यूनिट द्वारा करने की जानकारी एजेंसियों को मिली थी।
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