बुलंदशहर हिंसा : भीड़ ने इंस्पेक्टर सुबोध की पिस्टल छीनकर सिर में मारी थी गोली

Updated on: 14 December, 2019 07:27 AM
उत्तर प्रेदश (Uttar Pradesh) के बुलंदशहर (Bulandshahr) जिले के स्याना कोतवाली गांव महाव में गोकशी के बाद भड़की हिंसा में इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह (Inspector subodh singh) समेत एक युवक की भी मौत हो गई। गुस्साई भीड़ ने पुलिस चौकी समेत अनेक वाहनों को फूंक डाला। इस हिंसा में स्याना के सीओ समेत आधा दर्जन पुलिसकर्मी घायल हो गए। घटना के बाद भड़की हिंसा में इंस्पेक्टर स्याना सुबोध कुमार सिंह और ग्रामीण की मौत के मामले की जांच के लिए एडीजी इंटेलीजेंस एसबी शिरडकर को भेजा गया है। उनसे 48 घंटे में अपनी गोपनीय जांच रिपोर्ट देने को कहा गया है। बताया जा रहा है कि गोकशी के बाद हुए बवाल में हमलावर भीड़ ने पुलिसकर्मियों को घेर लिया था। इस दौरान इंस्पेक्टर सुबोध कुमार की पिस्टल छीनकर उनके सिर में गोली मार दी गई। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो कुछ 10-12 युवकों ने सुबोध सिंह को घेर लिया था और उनकी सरकारी पिस्टल लूट ली। इसके बाद इंस्पेक्टर को जमकर पीटा और ईंटों से सिर पर वार किया। इसी दौरान इंस्पेक्टर को सिर में गोली मारी गई। एडीजी कानून-व्यवस्था ने भी बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह को गोली लगने की पुष्टि हो गई है। बाईं भौंह की तरफ से सिर में 0.32 बोर की गोली घुसी है। इसके अलावा शरीर पर पिटाई के भी निशान हैं। बकौल प्रत्यक्षदर्शियों के इंस्पेक्टर ने अपनी सरकारी पिस्टल से फायर कर दिया। एक गोली हमलावर युवकों में शामिल एक को पैर से छूते हुए निकल गई। इसके बाद हमलावरों ने इंस्पेक्टर को दबोच लिया और उनकी पिस्टल तक छीन ली। ईंट से इंस्पेक्टर सुबोध के सिर पर कई वार किए और इसके बाद एक आरोपी युवक ने गोली सिर में उतार दी। बच सकते थे सुबोध सिंह लोगों के बीच बवाल में फंसे कोतवाल को उनके हमराह और पुलिस बल ने दगा दे दिया। भीड़ के पथराव-फायरिंग करते ही स्याना कोतवाल को वाहन में ही छोड़कर हमराह भाग निकले। करीब 15 मिनट तक घायल अवस्था में कोतवाल सुबोध कुमार सरकारी वाहन से खेत में लटकी अवस्था में पड़े रहे। बाद में उन्हें वहां से अस्पताल ले जाया गया। जहां उनकी मौत हो गई। जांच के लिए एसआईटी गठित सुबोध कुमार सिंह और ग्रामीण की मौत के मामले की जांच के लिए एडीजी इंटेलीजेंस एसबी शिरडकर को भेजा गया है। उनसे 48 घंटे में अपनी गोपनीय जांच रिपोर्ट देने को कहा गया है। पूरे मामले और इस संबंध में दर्ज होने वाले मुकदमों की गहन जांच के लिए आईजी रेंज मेरठ रामकुमार की अध्यक्षता में एक चार सदस्यीय एसआईटी भी गठित की गई है। एडीजी कानून-व्यवस्था आनंद कुमार ने यह जानकारी दी।
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