आयकर विभाग के लिए पहेली बन गए चांदनी चौक के 100 लॉकर, आखिर हैं किसके?

Updated on: 21 September, 2019 06:57 AM
आयकर विभाग ने बीते दिनों दिल्ली के चांदनी चौक बाजार की एक दुकान में छापेमारी की थी जहां उन्हें 300 लॉकर मिले थे जिनमें पैसे भरे थे। छापेमारी के बाद विभाग ने इन लॉकरों को सील कर दिया था। विभाग की तरफ से सील किए गए 300 लॉकरों में से 100 लॉकर विभाग समेत लॉकर संचालित करने वाली कंपनी के लिए भी पहेली बने हुए हैं। असल में लॉकर को जब्त करने के बाद 200 लॉकर मालिक तो जांच के लिए सामने आ गए, लेकिन 100 लॉकर मालिकों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। आयकर विभाग ने 5 नवंबर को चांदनी चौक के खारी बावली में फकीर चंद लॉकर्स एंड वॉल्टस प्राइवेट लिमिटेड के नाम से चल रहे लॉकर को जांच के लिए सीज कर दिया था। इसमें कुल 300 लॉकर थे। तब से अब तक आयकर विभाग 150 लॉकर को खोल कर जांच कर चुका है। इसमें से 25 करोड़ मिलने की बात सामने आई है। लॉकर संचालित करने वाली कंपनी के स्वामी अशोक कुमार के अनुसार बाकी बचे 150 लॉकर में से 50 लॉकर मालिकों की चाबियां जांच के लिए रखी हुई हैं। जबकि 100 लॉकर मालिक ऐसे हैं, जो लॉकर आवंटित होने के बाद से एक-दो बार के बाद से नहीं आए। व्यापारी के यहां मिली चाबी से सुराग एक केमिकल व्यापारी के यहां अक्टूबर के अंतिम हफ्ते में पड़े छापे के दौरान मिली चाबियों के जरिए आयकर विभाग को इन लॉकर तक पहुंचाया। छापे के दौरान कुछ चाबियों के अनुपयोगी मिलने पर उनके बारे में पूछने पर व्यापारी ने लॉकर की जानकारी दी। अशोक कुमार के अनुसार 31 अक्तूबर को आयकर विभाग ने लॉकर का सर्वे करने को लेकर नोटिस दिया था, लेकिन 2 नवंबर को विभाग ने जांच करने के लिए नोटिस जारी किया। इसके बाद इन लॉकरों को सील कर दिया गया। तब से इनकी जांच की जा रही है। दो बैंक कर्मचारियों को गवाह बनाया लॉकर की जांच में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आयकर विभाग ने दो बैंककर्मियों को गवाह बनाया हुआ है। दोनों ही बैंककर्मी सरकारी बैंकों की पुरानी दिल्ली शाखाओं से संबद्ध हैं। बड़े लॉकर का किराया 24 तो छोटे का चार हजार रुपये आयकर विभाग की तरफ से सील किए गए लॉकर आकार के हिसाब से पांच प्रकार से बंटे हुए हैं। सबसे बड़े लॉकर के लिए हर साल 24 हजार रुपये, जबकि सबसे छोटे आकार के लॉकर का किराया 4 हजार रुपये वार्षिक निर्धारित किया गया था। बताया जाता है कि यह पुरानी दिल्ली की एकमात्र निजी लॉकर सेवा है। लॉकर रूम में प्रवेश के लिए रजिस्टर में एंट्री करनी पड़ती थी। तीन रजिस्टर में से दो रजिस्टर आयकर विभाग ने जब्त किए हैं। लॉकर रूम के अंदर सीसीटीवी भी लगे हुए हैं। लॉकर रोजाना सुबह 11:20 बजे से शाम 7:20 तक खुले रहते थे। उधर, किराना कमेटी दिल्ली के अध्यक्ष विजय गुप्ता बंटी का कहना है कि सभी बैंक चार बजे बंद हो जाते हैं। व्यापारी दुकान में पैसा रखता है, तो वहां चोरी का भय रहता है। मालिक बोले, 20 साल से कारोबार कर रहे हैं लॉकर कंपनी के स्वामी अशोक कुमार ने बताया कि आरबीआई की मंजूरी के बाद 1992 से यह कंपनी संचालित होती आ रही है। कंपनी की वार्षिक आम बैठक भी आयोजित की जाती है और इसके दो निदेशक हैं। कंपनी नियमित तौर पर अपनी बैलेंस सीट मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स को भेजती है। उधर, व्यापारियों का कहना है कि अशोक कुमार व उनके भाई ने इस व्यवसाय को शुरू किया था। छह साल पहले उनके भाई इससे अलग हो गए। अशोक कुमार के अनुसार, इन लॉकरों की जांच राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनआईए) भी कर चुकी है। 5 सितंबर 2017 को एनआईए की टीम जांच के लिए यहां आई थी। उन्होंने कुछ लॉकरों की जांच की थी, जबकि करीब 10 साल पहले फेरा के तहत भी लॉकरों की जांच की चा चुकी है।
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