कटिया मारने व बिजली चोरी के अन्य तरीकों पर लगाम, बचे 8000 करोड़ रुपये

Updated on: 14 December, 2019 07:33 AM
यूपी पॉवर कारपोरेशन ने बिजली चोरी पर लगाम लगाकर 8000 करोड़ रुपये की बचत की है। वहीं 95 लाख नए कनेक्शन जारी होने के बाद यह घाटा बढ़ने के बजाए कम ही हुआ। इसे कारपोरेशन अपनी उपलब्धियों में गिना रहा है। हालांकि अब भी पॉवर कारपोरेशन के बिलिंग और राजस्व वसूली में आठ सात-आठ हजार करोड़ रुपये का अंतर बना हुआ है। प्रमुख सचिव ऊर्जा आलोक कुमार ने अफसरों को मार्च तक इस घाटे को और कम करने की हिदायत दी है। पिछले वर्ष तक प्रदेश में हर साल औसत 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक की बिजली चोरी और लाइन लॉस में ही चली जाती थी। इसमें लगभग 25 फीसदी बिजली चोरी और 20 फीसदी से अधिक वितरण लॉस में चला जाता है। पॉवर कारपोरेशन को हर महीने 1000-1200 करोड़ रुपये बिजली चोरी और वितरण लॉस से नुकसान हो रहा था। वैसे प्रदेश के सभी वितरण निगमों का हाल बुरा है लेकिन सबसे खराब हाल में पूर्वांचल और दक्षिणांचल वितरण निगम है। पूर्वांचल के कई जिलों में लाइन हानियां 50 से 60 फीसदी तक हैं। यही हाल दक्षिणांचल में भी है। कटिया, मीटरों में छेड़छाड़, बिना मीटर के सप्लाई जैसे कारणों के साथ कर्मचारियों की मिलीभगत से बिजली चोरी हो रही है। वहीं जर्जर तारों और ट्रांसमिशन की खराब व्यवस्था के कारण बिजली सप्लाई जितनी की जाती है उतनी अंतिम तौर पर उपभोक्ता तक नहीं पहुंच पाती है। इस बिजली को खरीदने में पैसा तो खर्च होता है लेकिन इसकी कीमत नहीं मिल पाती है और यह घाटे का सौदा साबित होता है।
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