69000 शिक्षक भर्ती: 'अभ्यर्थियों के हित का ख्याल न होता तो निरस्त कर देते परीक्षा'

Updated on: 19 October, 2019 11:09 AM
सरकार के अधिकारियों द्वारा बार-बार नियमों की अनदेखी और कोर्ट के आदेशों का अनुपालन न किये जाने पर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि लाखों अभ्यर्थियों के हित का ख्याल न होता तो पूरी परीक्षा ही निरस्त कर देते। ओपन कोर्ट में सुनवाई के दौरान न्यायालय ने स्थापित नियमों की अनदेखी कर, लिखित परीक्षा होने के बाद क्वालिफाइंग मार्क्स तय किये जाने पर हैरानी जताते हुए यह टिप्पणी की। न्यायालय ने मामले की अग्रिम सुनवाई के लिए 21 जनवरी की तिथि तय करते हुए, परीक्षा परिणाम के सम्बंध में यथास्थिति बरकरार रखने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान की एकल सदस्यीय पीठ ने मोहम्मद रिजवान व अन्य समेत कई दर्जनों अभ्यर्थियों की ओर से दाखिल नौ याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान पारित किया। याचिकाओं में राज्य सरकार की ओर से 7 जनवरी को जारी क्वालिफाइंग मार्क्स को चुनौती दी गयी है। जिसमें सरकार ने 65 प्रतिशत सामान्य वर्ग के व 60 प्रतिशत आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए क्वालिफाइंग मार्क्स घोषित किया है। याचियों का कहना है कि 1 दिसम्बर 2018 को भर्ती के लिए जारी विज्ञापन में कोई क्वालिफाइंग मार्क्स नहीं तय किया गया था। 6 जनवरी को लिखित परीक्षा हो गयी। जिसके बाद सरकार ने नियमों में परिवर्तन करते हुए क्वालिफाइंग मार्क्स तय कर दिये जबकि यह तय सिद्धांत है कि एक बार भर्ती प्रक्रिया प्रारम्भ होने के बाद नियमों मे परिवर्तन नहीं किया जा सकता है। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने यह भी कहा कि समझ नहीं आता कि राज्य सरकार के अधिकारी भर्ती प्रक्रिया सम्पन्न कराना भी चाहते हैं अथवा नहीं। दरअसल इसके पूर्व हुई सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा में क्वालिफाइंग मार्क्स 45 व 40 प्रतिशत तय किया गया था। लेकिन इस बार लिखित परीक्षा के बाद 7 जनवरी को एकाएक 65 व 60 प्रतिशत कर दिया गया। राज्य सरकार के अधिवक्ता भी 7 जनवरी के उक्त निर्णय का संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। शिक्षामित्रों के लिए है आखिरी मौका यही नहीं इसके पूर्व 6 मार्च 2018 को हाईकोर्ट ने टीईटी 2017 परीक्षा के सम्बंध में 14 प्रश्नों को हटाकर पुनर्मूल्यांकन के आदेश दिए थे और उक्त पुनर्मूल्यांकन के पश्चात जारी परिणाम के अनुसार उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा 2018 में बैठने की अनुमति दी जानी थी लेकिन बाद में डिविजन बेंच ने 6 मार्च 2018 के उक्त आदेश पर रोक लगा दी थी। हालांकि सर्वोच्च न्यायालय ने डिविजन बेंच के आदेश को इस आधार पर खारिज कर दिया कि एकल पीठ के समक्ष याचिकाएं दाखिल करने वाले सभी याचियों को सरकार की विशेष अपील में पक्षकार नहीं बनाया गया था। शीर्ष अदालत ने दो सदस्यीय पीठ को मामले को पुनः सुनने को कहा था। परंतु सरकार की ओर से दिसम्बर 2018 तक याचियों को पक्षकार नहीं बनाया गया और न ही 6 मार्च 2018 के आदेश का अनुपालन किया गया। याचियों का तर्क है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद 6 मार्च 2018 का आदेश प्रभावी हो चुका है। लेकिन सरकार इसका अनुपालन करने के लिए भी कदम नहीं उठा रही है। जबकि टीईटी 2017 की परीक्षा देने वाले शिक्षामित्रों के लिए सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा 2019 आखिरी मौका है क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार उन्हें मात्र दो परीक्षाओं में 25 मार्क्स का वेटेज मिलना है।
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