विपक्ष के सात किले BJP के निशाने पर, काम शुरू किया इस खास रणनीति पर

Updated on: 17 July, 2019 12:40 AM
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस बार लोकसभा चुनाव (LokSabha Election) में विपक्ष के सात गढ़ों को भेदने की जोरदार तैयारी शुरू की है। इन सीटों को अपनी झोली में डालने के लिए पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व ने एक खास रणनीति पर काम शुरू किया है। इन सभी सात लोकसभा सीटों के तहत आने वाली विधानसभा सीटों पर भाजपा के जीते विधायकों के साथ सरकार और संगठन के नेतृत्व ने विभिन्न चरणों में बैठक कर उन्हें अपने यहां की लोकसभा सीटों को जिताने की जिम्मेदारी सौंपी। इन सातों सीटों को जीतने के लिए अलग से प्रभारी बनाए गए हैं। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा खुद 71 और अपना दल सहयोगी दल की दो सीटों के साथ 80 में से 73 सीटें जीती थीं। इस चुनाव में सपा और कांग्रेस अपने ही किले बचाने में कामयाब हो पाए। सपा के मुखिया रहे मुलायम सिंह यादव खुद मैनपुरी और आजमगढ़ में चुनाव जीते तो उनके परिजन कन्नौज, फिरोजाबाद और बदायूं से चुनाव जीत पाए। इसी तरह कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी रायबरेली और मौजूदा अध्यक्ष अमेठी ही सीट अपनी बचा पाए। इस चुनाव में भाजपा के निशाने पर ये सभी सात सीटें हैं। अमेठी में कांग्रेस को घेरने की रणनीति भाजपा ने अमेठी में कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष राहुल गांधी को पूरी तरह से घेरने की रणनीति तैयार कर ली है। पिछले चुनाव ही नहीं, बल्कि पिछले 2004 से इस लोकसभा सीट से राहुल गांधी चुनाव जीत रहे हैं। यही नहीं, लम्बे अरसे से यह सीट गांधी परिवार के कब्जे में रही है। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने इस सीट से स्मृति ईरानी को उतार कर राहुल गांधी को सीधी चुनौती दी थी। नतीजतन, पिछले दो चुनावों में तीन लाख के अंतर से अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को हराने वाले राहुल गांधी स्मृति को केवल एक लाख ही वोटों से हरा पाए। कांग्रेस खासतौर से राहुल के गढ़ से आए इस नतीजे से भाजपा को यहां अपनी चुनावी फसल लहलहाने की उम्मीद नजर आ रही है। इसीलिए उसके निर्देश पर चुनाव हारने के बाद भी केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी लगभग हर महीने अमेठी आ रही हैं और केन्द्र व राज्य सरकार की योजनाओं के सहारे विकास के कामों को आगे बढ़ा रही हैं। वर्ष 2017 के अक्तूबर महीने में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने अमेठी आकर कांग्रेस को चुनौती दी। इसी तरह रायबरेली में पिछले साल अप्रैल के महीने में राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह आए और दिसम्बर के महीने में खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आए। विकास कार्यों को भुनाने की कोशिश भाजपा लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के इस किले को भेदने की कवायद में इस संसदीय क्षेत्र में किए गए विकास कार्यों को भुनाने की कोशिश में जुट गई है। अमित शाह के दौरे में तो रायबरेली संसदीय क्षेत्र में सोनिया गांधी के खास सिपाहसलार रहे और कांग्रेस के एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह भाजपा में शामिल हो गए। हरचंदपुर सीट से कांग्रेस के विधायक राकेश प्रताप सिंह भी अघोषित तौर पर भाजपा के साथ ही हैं। इसी तरह आजमगढ़ लोकसभा सीट के तहत पूर्वांचल एक्सप्रेस का शुभारम्भ करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आए और बड़ी जनसभा को यहां संबोधित किया।
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