यूपी: राम मंदिर निर्माण पर विहिप की दो दिवसीय धर्म संसद आज से

Updated on: 26 June, 2019 06:24 AM
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण, गो, गंगा समेत अन्य मुद्दों पर विश्व हिन्दू परिषद की दो दिवसीय धर्म संसद आज से शुरू होगी। बुधवार को शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती के 21 फरवरी को शिलान्यास करने की घोषणा के बाद राम मंदिर निर्माण को लेकर सरगर्मी बढ़ गई है। धर्म संसद में हिस्सा लेने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक मोहन भागवत बुधवार दोपहर को कुंभ मेला क्षेत्र में पहुंच चुके हैं। मोहन भागवत से मिलने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार सुबह प्रयागराज पहुंच रहे हैं। हालांकि मुख्यमंत्री धर्म संसद में शामिल नहीं होंगे। योगगुरु बाबा रामदेव, जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि, गोविन्द गिरि, स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, चिदानंद मुनि, माता अमृतामयी, जैन सम्प्रदाय के संत कमल मुनि, हंसदेवाचार्य, निम्बार्काचार्य, अखाड़ों के प्रतिनिधि, महामंडलेश्वर समेत पांच हजार लोग शामिल होंगे। विहिप के सेक्टर-14 स्थित शिविर में दोपहर एक सेचार बजे तक होने जा रही धर्म संसद में सबरीमाला मंदिर में यथास्थिति बनाए रखने, सामाजिक समरसता आदि मुद्दे भी रखे जाएंगे। संतों की ओर से भी मुद्दे विचार के लिए रखे जा सकते हैं। धर्म संसद में विहिप के केंद्रीय अध्यक्ष वीएस कोकजे, कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार, केंद्रीय महामंत्री संगठन विनायक राव देशपांडेय, केंद्रीय उपाध्यक्ष चम्प राय, केंद्रीय महामंत्री मिलिंद परांदे, केंद्रीय संत सम्पर्क प्रमुख अशोक तिवारी, केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल के संयोजक जीवेश्वर मिश्रा आदि पदाधिकारी भी मौजूद रहेंगे। माघ मेले की धर्म संसद में आए थे योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार से शुरू हो रही विहिप धर्म संसद में भले ही नहीं जा रहे हों लेकिन पिछले साल माघ मेले के दौरान परेड मैदान में आयोजित इसी धर्म संसद में मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने संतों के सामने दबी जुबान में राम मंदिर निर्माण करने की प्रतिबद्धता भी जाहिर की थी। योगी आदित्यनाथ बतौर सांसद 2013 के महाकुम्भ में आयोजित विहिप की धर्म संसद में भी शामिल हुए थे। 2013 में मोदी को पीएम उम्मीदवार बनाने की उठी थी मांग 2013 महाकुंभ के दौरान विहिप की अगुवाई में आयोजित धर्मसंसद में साधु-संतों ने नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवार बनाने की मांग उठाई थी। फरवरी 2013 के पहले सप्ताह में आयोजित धर्म संसद में साधु-संतों ने राम मंदिर निर्माण के लिए देश भर में माहौल बनाने की बात कही थी। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने प्रधानमंत्री पद के लिए भले ही खुलकर मोदी का नाम नहीं लिया था, मगर उन्होंने यह जरूर कहा था कि अब दिल्ली में वही बैठेंगे जो अयोध्या में राम मंदिर बनाएंगे।
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