CEC का बैलट पेपर से चुनाव कराने से इंकार, बोले- EVM सुरक्षित

Updated on: 17 July, 2019 12:36 AM
मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुनील अरोड़ा ने ईवीएम को पूरी तरह सुरक्षित बताते हुए शुक्रवार को बैलट पेपर से चुनाव कराने से इन्कार कर दिया। कई राजनीतिक दलों के नेताओं ने ईवीएम की प्रामाणिकता पर सवाल उठाते हुए बैलट पेपर की तरफ लौटने की मांग की है। आगामी आम चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों और अधिकारियों के साथ दो दिन के विचार-विमर्श के बाद अरोड़ा मीडिया के साथ बातचीत कर रहे थे। सुनील अरोड़ा ने कहा कि हम बैलट पेपर के युग में वापस नहीं जा रहे हैं। दो दशक से भी अधिक समय से हमारे देश में इवीएम का इस्तेमाल हो रहा है । और यह काफी समय से ईसीआई (भारत निर्वाचन आयोग) की एक सुसंगत नीति रही है और मुझे लगता है कि यह नीति जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को अपनी प्रतिक्रिया देने और आशंका जाहिर करने का अधिकार है, लेकिन हम मतपत्र छीनने के दिनों में नहीं जा रहे हैं। हैकर के दावे के पीछे आपराधिक मंशा अरोड़ा ने बताया कि ईवीएम से छेड़छाड़ और खराबी के बीच अंतर है। हम बहुत ही हल्के शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं जैसे कि वे समानार्थी हों। आयोग खराबी को कतई बर्दाश्त नहीं कर सकता है। हम लगातार ईवीएम को अद्यतन और पूरी तरह सुरक्षित बनाने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिका स्थित एक स्वयंभू हैकर के हाल के दावे कि 2014 के चुनाव में ईवीएम में छेड़छाड़ कर धांधली की गई थी, अरोड़ा ने कहा कि ये दावे झूठे और आपराधिक मंशा से किए गए हैं। बेहद सुरक्षित कंपनियां बनाती हैं ईवीएम मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने बताया कि ईवीएम का निर्माण बेहद सुरक्षित कंपनियां करती हैं। ये कंपनियां रक्षा उपकरण भी बनाती हैं और तकनीकी विशेषज्ञों का पैनल इनकी देखरेख करता है। हाल ही में प्रदेश में हुए विधानसभा चुनावों में वीवीपैट का इस्तेमाल सफल रहा है और आगामी लोकसभा चुनावों में इसका इस्तेमाल पूरे देश में किया जाएगा। उन्होंने बताया कि वीवीपैट मशीनों का इस्तेमाल पश्चिम बंगाल में तीन उपचुनावों में किया गया और कहीं से भी दोबारा मतगणना का आग्रह नहीं किया गया। पुलिस आयुक्त की गैरहाजिरी पर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने यहां संपन्न हुई चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ की एक बैठक के दौरान कोलकाता पुलिस आयुक्त राजीव कुमार की अनुपस्थिति को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार से शुक्रवार को स्पष्टीकरण मांगा। चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ ने लोकसभा चुनाव को अधिक समावेशी, सुलभ और भागीदारी वाला बनाने के उद्देश्य से नागरिक समाज से जुड़े संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ गुरुवार को बैठक की थी।
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