महाशिवरात्रि : पहले भस्म से श्रृंगार, फिर पहुंचे बाबा विश्वनाथ के दरबार

Updated on: 20 March, 2019 11:54 PM
दिन-सोमवार। समय-सुबह के छह बजे। स्थान-बड़े हनुमान घाट स्थित जूना अखड़ा और आसपास का क्षेत्र। दृश्य- सैकड़ों नागा साधु गंगा स्नान करके घाट किनारे खड़े होकर अंग-प्रत्यंग में भस्म लगा कर अपना शृंगार कर रहे हैं। सर्वांग भस्म लगा चुके नागा साधु अपनी कुटिया या अखाड़े की ओर बढ़ रहे हैं। गंगा स्नान करके निकले नागा साधु उनकी जगह लेते जा रहे हैं। ब्रह्म मुहुर्त से चल रह यह क्रम अब लगभग पूर्ण होने को है। सुबह सात बजते-बजते बाबा विश्वनाथ के शाही दर्शन के दौरान शोभायात्रा की अगुवाई करने के लिए जूना अखाड़ा के नागाओं का जत्था अपनी अपनी जगह ले चुका है। कतार में सबसे आगे मानवेंद्र गिरी ने दुंदुभि बजानी शुरू कर दी है। यह इस बात का संकेत है कि अब रवानगी का वक्त हो चुका है। हरिश्चंद्र घाट के मुख्य मार्ग पर दूर तक सिर्फ जटाधारी ही दिख रहे हैं। युवा नागा हाथ में त्रिशूल व दंड लिए, आंखों पर काला चश्मा चढ़ाए भोलेनाथ के जयकारे लगा रहे हैं। सुबह के करीब सवा सात बजे दुंदुभि की तीसरी पुकार के साथ संतों, महंतों आचार्यों और महामंडलेश्वरों का काफिला शाही दर्शन के लिए प्रस्थान कर चुका है। शाही काफिले के बीचो बीच धर्म ध्वजा है। इसके ठीक पीछे गेरुआ धारी नागा साधुओं ने गुरु महाराज की पालकी अपने कंधे पर उठा रखी है। इनके पीछे है देसी-विदेशी महिला नागा साधुओं का समूह। इस समूह में कोरियन और रूसी मूल की नागा साधु भी गेरुधा धारण किए जय विश्वनाथ... का घोष करती आगे बढ़ रही हैं। इसी समूह में शामिल हैं 84 वर्षीय माता हेमा गिरी। उनके झुर्रीदार चेहरे पर शिव के प्रति समर्पण का भाव दमक रहा है। संतों का काफिल आगे बढ़ने के साथ डमरुओं का निनाद और नगाड़ों की अनुगूंज तेज हो रही है। करीब पौन घंटे में साधु संत गोदौलिया चौराहे पहुंच चुके हैं। गोदौलिया से जंगमबाड़ी मठ तक गेरुआधारी और दिगंबर नागाओं की मिली जुली भीड़ दुर्लभ दृश्य उपस्थित कर रही है। आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरी अपने रथ पर सवार होकर भक्तों को दर्शन दे रहे हैं और सेलफोन पर अपने अन्य भक्तों के संपर्क में भी हैं। जूना अखाडा की अगुवाई में एक के बाद एक अखाड़े बाबा दरबार की ओर बढ़ते जा रहे हैं। ज्ञानवापी परिक्षेत्र में नागा साधुओं का उतावलापन देखते ही बनता है। डमरू बजाते, त्रिशूल लहराते वे उछल-उछल कर बाबा दरबार की ओर बढ़ रहे हैं। कोई अपनी जटाएं खोल कर नृत्य करते हुए आगे बढ़ रहा है तो कोई आह्लादित होकर आंखें बंद किए दोनों हाथ हवा में लहरा कर झूम रहा है। निरंजनी, अटल, आनंद, अग्नि, दिगंबर और आवाहन अखाड़ा के संतों के बाद दोपहर के पौने बारह बजे के करीब महानिर्वाणी अखाड़ा की शाही यात्रा गोदौलिया चौराहे से आगे बढ़ रही है। बाबा दरबार की ओर जाने वाली कतार में खड़े भक्त पूरे भक्ति भाव से शोभायात्रा के दर्शन कर खुद को धन्य समझ रहे हैं। सिर पर अपने ठाकुर जी को लिए बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने पहुंची बलिया की स्वाति पांडेय कह रही हैं ‘बाबा विश्वनाथ के दर्शन से पूर्व इतने सारे सिद्ध संतों के दर्शन पाकर मेरे कई जन्मों के पाप धुल गए।’
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