कूटनीति: मसूद अजहर पर प्रतिबंध के लिए चीन का साथ लाएंगे!

Updated on: 16 October, 2019 06:04 AM
मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र से वैश्विक आतंकी घोषित कराने के मामले में अभी तक किसी देश ने स्पष्टीकरण नहीं मांगा है। किसी देश के विरोध की बात भी अभी तक सामने नहीं आई है। भारत पूरी कोशिश कर रहा है कि चीन इस बार अपने वीटो का इस्तेमाल कर इस मामले में रोड़ा न अटकाए। हालांकि चीन से फिलहाल कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला है लेकिन उससे बातचीत लगातार जारी है। गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन की ओर से मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित करने के लिए साझा प्रस्ताव पेश किया गया है। विश्व निकाय के सदस्य देशों के पास इस मामले में कोई भी स्पष्टीकरण मांगने के लिए 13 मार्च तक का समय है। पूरे मामले में चीन का रुख बहुत अहम है। उच्च स्तर पर प्रयास जारी सूत्रों ने कहा, भारत की ओर से प्रस्ताव पर चीन को राजी करने की हरसंभव कोशिश हो रही है। अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन के अलावा अन्य देश भी प्रस्ताव पर सहमति के लिए अपने स्तर से प्रयास कर रहे हैं। भारत ने चीन से उच्च स्तर पर कूटनीतिक संपर्क साधा है। सूत्रों ने कहा कि इस बार तस्वीर पहले की तुलना में काफी अलग है। बदले दृष्टिकोण से उम्मीद सूत्रों ने कहा, पुलवामा हमले के बाद पाक प्रायोजित आतंकवाद पर भारत पूरी दुनिया का दृष्टिकोण बदलने में कामयाब रहा है। लेकिन चीन कोई भी कदम पाकिस्तान को भरोसे में लेकर ही उठाना चाहता है। चीन के पाकिस्तान में कई तरह के हित हैं। चीन ने पाकिस्तान की आर्थिक योजनाओं में भागीदारी की है। इसके साथ ही वह पाकिस्तान को अपना नजदीकी रणनीतिक सहयोगी मानता है। कई मुद्दों पर एक राय नहीं भारत से चीन के बेहतर होते रिश्तों के बावजूद कई मसलों पर दोनों देशों के बीच असहमति रही है। चीन चाहता है कि अगर वह भारत का रणनीतिक मामले में समर्थन करता है तो भारत को भी उसके आर्थिक हित से जुड़ी ओबीओआर जैसी परियोजनाओं पर रुख बदलना चाहिए। सूत्रों ने कहा कि आतंकवाद के मामले में भारत किसी तरह के लेनदेन पर बात नहीं कर रहा है। उसका प्रयास यह है कि आतंकवाद के मामले में सभी देश एक भाषा में बोलें। भारत का दबाव यह भी है कि अगर पाकिस्तान सही मायने में गंभीरता दिखाना चाहता है तो वह मसूद के मामले में कोई विरोध दर्ज न कराए।
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