Lok Sabha election 2019: बंगाल में भाजपा का चुनावी रथ रोकना ममता की सबसे बड़ी चुनौती

Updated on: 22 May, 2019 07:09 AM
पतली किनारी वाली सफेद साड़ी और हवाई चप्पल पहनने वाली ममता बनर्जी 'बंगाल की शेरनी' कहलाती हैं। इस बार उनके लिए अपने गढ़ को बचाने की सबसे बड़ी चुनौती होगी। भाजपा राज्य में अपने पैर जमाने की पुरजोर कोशिश में है। दिल्ली की राजनीति में खुद को मजबूत नेता के तौर पर स्थापित करने के लिए ममता के लिए राज्य में भाजपा को रोकना बेहद जरूरी होगा। 2014 में उनकी पार्टी ने 42 में से 34 लोकसभा सीटें जीतीं। उनकी सक्रियता देख लगता है कि उनकी नजर दिल्ली पर है। छोटी उम्र में संघर्ष : छोटी उम्र में सिर से पिता का साया उठ गया तो परिवार चलाने के लिए ममता को दूध बेचना पड़ा। मुसीबतों ने उन्हें सख्त बना दिया। ममता ने ‘मां, माटी, मानुष'के नारे के साथ पश्चिम बंगाल में सीपीएम शासन के खिलाफ संघर्ष शुरू किया। इरादे की पक्की :1993 में जब एक बलात्कार पीड़िता को न्याय दिलाने की कोशिश में उन्हें राइटर्स बिल्डिंग से जबरन निकाला गया। इस भवन में कदम नहीं रखने की कसम को उन्होंने मुख्यमंत्री बनने तक निभाया। दीदी कई मौकों पर एनडीए के साथ खड़ी दिखीं तो कई बार यूपीए में। ' केन्द्र में मंत्री -1991 से 1993 तक मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री. - 13 अक्तूबर 1999 से 16 मार्च 2001 तक : रेलमंत्री (एनडीए सरकार में). - 9 जनवरी 2004 से मई 2004 तक : कोयला मंत्री (एनडीए सरकार में). - 22 मई 2009 से 19 मई 2011 तक : रेल मंत्री (यूपीए-2 के शासन में). सात बार संसद में - 1984 में कांग्रेस सांसद बनीं. - 1991 से 2009 तक छह बार लोकसभा चुनाव जीते। राजनीतिक सफर - 1976 में पश्चिम बंगाल महिला कांग्रेस की महासचिव बनीं। - 1984 में ऑल इंडिया यूथ कांग्रेस *की महासचिव बनाई गईं।. - उसी वर्ष 29 साल की उम्र में आठवीं लोकसभा की सबसे युवा सांसद बनीं।. - 1990 में पश्चिम बंगाल यूथ कांग्रेस की अध्यक्ष बनीं।. - 1997 में कांग्रेस से अलग होकर *तृणमूल कांग्रेस का गठन किया।. - 1999 में कोलकाता (दक्षिण) से *तृणमूल सांसद निर्वाचित हुईं।. - 2011 में 34 साल से पश्चिम बंगाल *की सत्ता पर काबिज सीपीएम को पराजित कर मुख्यमंत्री बनीं।. सोशल प्रोफाइल - 2014 से ट्विटर पर सक्रिय. - 23 लाख से अधिक हैं फॉलोअर. निजी जीवन - 5 जनवरी 1955 को कोलकाता में जन्म. - कानून में स्नातक और इतिहास में एमए हैं. - 1970 के दशक में छात्र राजनीति में आईं.
View More

24x7 HELP

Visitor
अब तक देखा गया