लोकसभा चुनाव में भी ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ पर चलेगी कांग्रेस

Updated on: 20 July, 2019 02:57 AM
विधानसभा की तर्ज पर कांग्रेस लोकसभा में भी ‘नरम हिंदुत्व' का रास्ता अपनाएगी। चुनाव प्रचार के दौरान जहां कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मंदिर जाकर भगवान के दर्शन करने की अधिक से अधिक कोशिश करेंगे, वहीं चुनाव घोषणा पत्र में भी अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों को पार्टी एहतियात के साथ उठाएगी। चुनाव घोषणा-पत्र से जुड़े पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि अल्पसंख्यकों का विकास घोषणा पत्र का हिस्सा होगा। मगर पार्टी वादा करते समय अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों पर खास एहतियात बरतेगी। पार्टी का कहना है कि इस बार लोकसभा चुनाव काफी अहम हैं। इसलिए, वह भाजपा को धुव्रीकरण का मौका नहीं देगी। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान घोषणा-पत्र में कांग्रेस ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को शामिल किया था। इनमें सच्चर समिति की सभी सिफारिशों को लागू करने के साथ-साथ पिछड़े-अल्पसंख्यकों के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण का प्रावधान करने का भी वादा किया था। मगर इस बार स्थिति वैसी नहीं है और कांग्रेस पार्टी भी इस बात को अच्छी तरह से समझ रही है। गुजरात विधानसभा चुनावों में राहुल ने 28 मंदिरों में मत्था टेका गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी ने करीब 28 मंदिरों में जाकर मत्था टेका था। प्रचार के दौरान राहुल ने खुद को शिवभक्त बताया था। पार्टी ने कर्नाटक, मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी सॉफ्ट हिंदुत्व को अपनाया। पार्टी को इसका सियासी फायदा भी मिला। इससे पहले हिंदुत्व भाजपा का ऐसा हथियार था, जिसका कांग्रेस के पास कोई जवाब नहीं था। पार्टी के एक नेता ने कहा कि अल्पसंख्यकों का कल्याण चुनाव घोषणा-पत्र में शामिल होगा, पर पार्टी पिछले घोषणा-पत्र की तरह ‘प्रायॉरिटी सेक्टर लेंडिग' (अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को प्राथमिकता के आधार पर ऋण) जैसे वादे नहीं करेगी ताकि, पार्टी पर मुसलमानों की हिमायत का आरोप नहीं लग सके। मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी रखा था ख्याल मध्य प्रदेश और राजस्थान में सरकार बनाते वक्त भी कांग्रेस ने इसका खास ख्याल रखा था। मध्य प्रदेश और राजस्थान में सिर्फ एक-एक मुस्लिम मंत्री बनाया है। भाजपा लगातार कांग्रेस को मुस्लिम परस्त पार्टी साबित करने की कोशिश करती रही है। कई चुनावों में कांग्रेस को इसका नुकसान भी हुआ है। पिछले लोकसभा चुनाव में हार के कारणों पर गठित ए.के. एंटनी समिति ने भी माना था कि कांग्रेस को इन आरोपों से राजनीतिक नुकसान हुआ है। इसके बाद राहुल गांधी ने नरम हिंदुत्व का रास्ता अपनाया।
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