लोकसभा चुनाव 2019 : इन सीटों की राजनीति की धुरी बनेगी काशी

Updated on: 17 October, 2019 07:12 AM
कहा जाता है कि देश की सत्ता का रास्ता यूपी से होकर गुजरता है और यूपी को जीतने के लिए पूर्वांचल को जीतना जरूरी है। विधानसभा चुनाव हो या लोकसभा। अब तक का राजनीतिक इतिहास रहा है कि केन्द्र व राज्य में जिसकी भी सरकार रही उसे पूर्वांचल के लोगों का खासा समर्थन मिला तभी वह सत्ता के शिखर पर बैठे। इसी फॉर्मूले को बीजेपी ने अपनाया और 2014 के लोकसभा और 2017 के विधानसभा चुनाव में यूपी में सबसे ज्यादा सीटें हासिल की। इसी रणनीति के तहत बीजेपी मिशन 2019 को फतह करने में जुटी है। तय है आने वाले दिनों में काशी पूर्वांचल की राजनीति की एक बार फिर धुरी बनने जा रहा है। कारण भी साफ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काशी से ही चुनाव लड़ने जा रहे हैं। ऐसे में विपक्षी दलों का पूरा जोर बनारस समेत पूर्वांचल पर होगा। वहीं भारतीय जनता पार्टी प्रधानमंत्री के जरिए पूर्वांचल के साथ ही पश्चिम बिहार को साधने की कोशिश करेगी। पिछले लोकसभा व विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी ने कुछ ऐसी ही रणनीति बनाई थी। आंकड़ों की बात करें तो वर्तमान में पूर्वांचल की 26 में 23 सीटों पर भाजपा व उसके गठबंधन की पार्टी के सांसद हैं। इसमें वाराणसी से पीएम नरेंद्र मोदी, गाजीपुर से रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा व मिर्जापुर से अपना दल की नेता केंद्रीय अनुप्रिया पटेल हैं। गोरखपुर में खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कमान संभाल ली है। पूर्वांचल की एक मात्र सीट आजमगढ़ सपा के कब्जे में है। प्रियंका पर टिकी निगाहें: फिलहाल प्रियंका गांधी की पहली पूर्वांचल यात्रा के बाद आने वाले दिनों में चुनावी समर और तेज होना तय है। पूर्वांचल ब्राह्मणों का मजबूत गढ़ माना जाता है। एक दौर में ब्राह्मण पारंपरिक तौर पर कांग्रेस के समर्थक थे। ऐसे में माना जा रहा है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में इन्हीं ब्राह्मणों को एकजुट करने और अपनी तरफ लाने की रणनीति के तहत प्रियंका को कमान दी गयी है। प्रत्याशियों के चयन से लेकर अगली रणनीति प्रियंका के फीडबैक पर ही निर्भर करेगी। आजमगढ़ से सपा जीत की तैयार करेगी जमीन : पूर्वांचल में जातिगत समीकरण के तहत गठबंधन में उतरी सपा-बसपा कितने सफल हो पाएंगे यह तो भविष्य में है, लेकिन उपचुनाव में गोरखपुर जीतने के बाद सपा ने अपनी जमीन को मजूबत किया है। सपा अब गठबंधन के साथ मिलकर अपनी गंवाई सीटों पर कब्जा करने का प्रयास करेगी। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव इस बार आजमगढ़ से चुनाव लड़ेंगे। ऐसे में पिता की विरासत बचाने और मोदी को टक्कर देने के लिए अखिलेश यादव आजमगढ़ से पूरे पूर्वांचल को जीतने के लिए जमीन तैयार करेंगे। खाता खोलने के लिए बसपा का सबसे पहले प्रयास : शून्य के आंकड़े पर चल रही बसपा भी अपने कैडर वोटों को सहेजने में लगी है। पार्टी का पहला प्रयास यही होगा कि वह अपना खाता खोले। कम से कम 2009 के लोकसभा चुनाव की जीती चार सीटों का आंकड़ा पार हो। बहरहाल, कैडर वोटों के लिए बसपा ने अपनी ताकत झोंक दी है। गठबंधन से बसपा को और ज्यादा मजबूती मिलेगी। ये हैं लोकसभा सीटें कुशीनगर, गोरखपुर, देवरिया, बांसगांव, बहराइच, डुमरियागंज, महराजगंज, आंबेडकरनगर, बस्ती, संत कबीर नगर, आजमगढ़, घोसी, लालगंज, सलेमपुर, बलिया, जौनपुर, मछलीशहर, गाजीपुर, चंदौली, वाराणसी, भदोही, मिर्जापुर, फतेहपुर, फूलपुर, इलाहाबाद और प्रतापगढ़। पिछले लोकसभा चुनाव में किसको कितनी सीटें 2014 2009 भाजपा 23 09 अद 02 00 सपा 01 09 कांग्रेस 00 04 बसपा 00 04 2017 विधानसभा चुनाव पार्टी सीटें भाजपा 87 अपना दल 09 भासपा 04 सपा 14 कांग्रेस 00 बसपा 10 अन्य 06
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