लोकसभा चुनाव 2019 : पूर्वांचल से पांच महिलाओं ने किया संसद का सफर

Updated on: 17 October, 2019 02:13 PM
संसद और विधानसभा में आधी आबादी की भागीदारी काफी कम हैं। पूर्वांचल के 13 संसदीय सीटों की बात करें तो यहां से अब तक केवल पांच महिलाएं ही लोकसभा तक पहुंच सकी हैं। सबसे पहले बात आजमगढ़ की। यहां की लोकसभा सीट पर 1978 के उपचुनाव में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मोहसिना किदवई ने जीत हासिल की। वह प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष भी रहीं। 1977 में इस सीट पर जनता पार्टी के टिकट पर रामनरेश यादव विजयी हुए थे। जब उन्होंने मुख्यमंत्री पद का कार्यभार संभाला तो लोकसभा की सदस्यता से त्यागपत्र देना पड़ा, जिसके कारण उपचुनाव हुआ। चंदौली लोकसभा क्षेत्र से 1984 में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पंडित कमलापति त्रिपाठी की पुत्रवधू चंद्रा त्रिपाठी ‘बहूजी’ निर्वाचित हुईं। वह उस समय जिला कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष भी थीं। उनके पति लोकपति त्रिपाठी प्रदेश में लंबे समय तक विभिन्न विभागों के मंत्री रहे। 1996 में भदोही (मिर्जापुर) लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी ने दस्यु सुंदरी के रूप में चर्चित फूलन देवी को टिकट देकर मुकाबले को रोचक बनाया। इस सीट का चुनाव पूरे देश में चर्चा का विषय रहा। फूलन देवी ने विजय हासिल की। भाजपा के वीरेंद्र सिंह मस्त को शिकस्त दी। तेरहवीं लोकसभा में इसी सीट से वह 1999 में दोबारा चुनी गईं। वह 2001 तक सांसद रहीं। मिर्जापुर संसदीय क्षेत्र से 2014 में अपना दल (सोनेलाल) के टिकट पर अनुप्रिया पटेल पहली बार लोकसभा के लिए निर्वाचित हुईं। केंद्र में परिवार कल्याण राज्यमंत्री बनने का गौरव हासिल किया। इससे पहसे वह रोहनिया क्षेत्र से विधायक थीं। 2014 में ही लालगंज लोकसभा सीट से बीजेपी के टिकट पर नीलम सोनकर ने जीत का परचम लहराया। वह पहली बार लोकसभा तक पहुंचने में सफल रहीं।
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