गिरिराज सिंह की नाराजगी पर बोले रामविलास पासवान, नवादा की सीट पर LJP ने नहीं की थी दावेदारी

Updated on: 16 September, 2019 02:54 AM
बीजेपी नेता गिरिराज सिंह की नाराजगी के सवाल पर लोजपा सुप्रीमो रामविलास पासवान ने कहा कि हमने पहले ही कहा था कि सीटिंग सीट पर हम दावा नहीं करेंगे। जदयू व भाजपा नेताओं को इसकी जानकारी दे दी थी। वहीं गिरिराज सिंह ने आखिरकार सोमवार को अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा था कि नवादा के बदले बेगूसराय सीट से उम्मीदवार बनाए जाने के फैसले को निराशाजनक है। बिहार भाजपा में मात्र अपनी सीट बदले जाने का ठीकरा प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय पर फोड़ा। पासवान ने कहा कि मुंगेर लोजपा की सीटिंग सीट थी, लेकिन जदयू इसे लेना चाह रहा था। इसलिए हमने मौजूदा सांसद वीणा देवी का ख्याल रखते हुए जातिगत समीकरण के आधार पर नवादा या बेगूसराय का प्रस्ताव दिया था। पासवान ने कहा कि कई महीने पहले एक बैठक में गिरिराज सिंह से नवादा पर चर्चा की तो वे बोले कि अब चुनाव नहीं लड़ना चाहते हैं, समाजसेवा करना चाहते हैं। हाल ही में लोजपा सांसद चिराग पासवान ने गिरिराज सिंह को फोन किया तो वे भावविह्वल होकर बोले कि हमें कोई आपत्ति नहीं है। पासवान ने दो टूक कहा कि नवादा को लेकर हमारी ओर से कोई मांग नहीं थी। गठबंधन में जो सीट मिली, उसे लिया। दावा है कि एनडीए नवादा, बेगूसराय सहित सभी 40 सीटों पर जीतेगा। पार्टी के प्रदेश कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में लोजपा सुप्रीमो ने राहुल गांधी की ओर से न्यूनतम आय योजना की घोषणा पर कहा कि होली का त्योहार समाप्त हुआ है। इस चुनावी मौसम में लोग तरह-तरह के रंग छोड़ रहे हैं। चुनाव के समय ऐसी योजनाओं की घोषणा का साफ अर्थ है कि वे गरीबों के साथ मजाक कर रहे हैं। सत्ता में थे तो गरीबों की याद क्यों नहीं आई। खगड़िया से अल्पसंख्यक को टिकट दिए जाने के सवाल पर कहा कि इसके पहले भी साबिर अली को राज्यसभा भेजा गया था। कैसर ऑल इंडिया हज कमेटी के निर्वाचित अध्यक्ष भी हैं। मौके पर सांसद रामचंद्र पासवान, अब्दुल खालिक, प्रिंस, श्रवण कुमार अग्रवाल आदि मौजूद थे। गिरिराज सिंह ने कहा था कि मैं आहत हूं 'हिन्दुस्तान' से बातचीत में गिरिराज ने कहा कि मैं आहत हूं। आहत इसलिए नही हूं कि बेगूसराय मिला। बेगूसराय तो मैं 1996 से चाह रहा था, लेकिन 2014 में कहा गया कि भोला बाबू (अब दिवंगत) नवादा के बदले बेगूसराय चाहते हैं। उनकी अंतिम इच्छा बताकर मुझे नवादा भेजा गया। नवादा में पांच साल में हमने जितना चाहा काम किया। लेकिन बिना मुझसे पूछे, बिना भरोसे में लिए प्रदेश नेतृत्व ने मुझे डिस्प्लेस कर दिया, जबकि बिहार भाजपा में किसी की सीट नहीं बदली गई। उससे भी बड़ी बात यह कि मुझे अंतिम क्षण तक प्रदेश अध्यक्ष कहते रहे कि मैं जहां से चाहूंगा, चुनाव लड़ूंगा। सीट बदले जाने से मेरे स्वाभिमान को ठेस पहुंची है। मैं आज का कार्यकर्ता नहीं हूं। मैं उस समय से भाजपा में हूं जब इसकी शुरुआत हो रही थी।
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