सपा का अभेद्य किला आजमगढ़ भाजपा के लिए चुनौती,जानें क्षेत्र का समीकरण

Updated on: 14 December, 2019 03:28 PM
सपा का अभेद्य गढ़ बन चुका आजमगढ़ इस बार भी भाजपा के लिए बड़ी चुनौती है। पार्टी को पूर्वांचल में ठोक आधार देने के लिए पिता मुलायम सिंह यादव के बाद अब अखिलेश यादव ने आजमगढ़ को चुनकर अपने लिए सबसे सुरक्षित ठौर बनाया है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के ताल ठोंकने से आजमगढ़ सीट से इस बार भी खासी चर्चा में आ गई है। पिछली बार इसी सीट से तत्कालीन सपा अध्यक्ष और अब संरक्षक की भूमिका में आ चुके मुलायम सिंह यादव ने चुनाव मैदान में ताल ठोंकी थी और विजयी रहे थे। इस बार मुलायम सिंह यादव अपनी परंपरागत सीट मैनपुरी से चुनाव लड़ने जा रहे हैं तो आजमगढ़ में तैयार की गई सियासी जमीन उनके बेटे अखिलेश संभालने की तैयारी में हैं। अखिलेश अपनी पसंद वाली कन्नौज लोकसभा सीट पहले ही पत्नी डिम्पल यादव के हवाले कर चुके हैं। तीन दलों से चार बार सांसद चुने गए रमाकांत यादव : आजमगढ़ सीट पर मुलायम सिंह यादव की दावेदारी से पहले आजमगढ़ के ही रमाकांत यादव कभी सपा तो कभी बसपा और भाजपा से सांसद चुने जाते रहे। उनकी इस विजय के कारण सपा आजमगढ़ को अपने खास वोटबैंक के प्रभाव वाला क्षेत्र मानती रही है। रमाकांत ने वर्ष 1996 में पहली बार सपा के टिकट पर यहां से जीत दर्ज की थी, लेकिन वर्ष 1998 में बसपा प्रत्याशी के रूप में अकबर अहमद डम्पी ने यह सीट उनसे छीन ली। रमाकांत यादव दूसरी बार वर्ष 1999 में सपा प्रत्याशी के रूप में तो तीसरी बार वर्ष 2004 में बसपा प्रत्याशी के रूप में लोकसभा पहुंचे। वर्ष 2008 में इस सीट पर हुए उप चुनाव में एक बार फिर बाजी बसपा प्रत्याशी रहे अकबर अहमद डम्पी के हाथ लगी और रमाकांत को भाजपा प्रत्याशी के रूप में दूसरे स्थान से संतोष करना पड़ा। वर्ष 2009 के चुनाव में एक बार फिर बाजी रमाकांत यादव के हाथ लगी और वह भाजपा प्रत्याशी के रूप में लोकसभा पहुंचने में सफल रहे। भाजपा प्रत्याशी के रूप में ही वह वर्ष 2014 के चुनाव में भी मैदान में उतरे लेकिन सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के सामने टिक नहीं पाए। मुलायम ने चुनाव में 3,40,306 वोट हासिल किए जबकि रमाकांत यादव को 2,77,102 मत मिले। हालांकि कम मतों से मिली इस जीत के कारण मुलायम सिंह ने आजमगढ़ सीट अपने पास बनाए रखी और मैनपुरी सीट से इस्तीफा दे दिया। वर्ष 2014 के चुनाव में ही वह मैनपुरी लोकसभा सीट से भी मैदान में उतरे थे और जीत दर्ज की थी। अब सपा की योजना है कि पूर्वांचल में पार्टी की पकड़ बनाए रखने के लिए आजमगढ़ को मजबूत गढ़ के तौर पर तैयार किया जाए। इसी योजना के तहत अब अखिलेश यादव खुद यहां से मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। बसपा के साथ गठबंधन के कारण इस सीट को सपा अपने लिए काफी अनुकूल मान रही है। लोकसभा क्षेत्र में आने वाली पांचों विधानसभा सीटों पर गठबंधन में शामिल दोनों दलों सपा-बसपा का ही कब्जा है। आजमगढ़ लोस क्षेत्र में आने वाली विधानसभा सीटें गोपालपुर-नफीस अहमद-सपा सगड़ी-वंदना सिंह-बसपा मुबारकपुर-शाह आलम-बसपा आजमगढ़-दुर्गा प्रसाद-सपा मेहनगर-कल्पनाथ पासवान-सपा भाजपा ने नहीं खोले पत्ते कभी रमाकांत यादव के जरिए इस सीट पर अपना खाता खोलने वाली भाजपा ने इस बार अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। प्रत्याशी चयन को लेकर पार्टी आसानी से निर्णय नहीं ले पा रही है। कभी भोजपुरी फिल्मों के अभिनेता और लोकप्रिय गायक दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ को मैदान में उतारे जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं तो वन मंत्री दारा सिंह चौहान को। वैसे लोकसभा क्षेत्र में आने वाली सभी पांच विधानसभा सीटों में से एक भी भाजपा के पास नहीं है।
View More

24x7 HELP

Visitor
अब तक देखा गया