सरकारी कंपनी BSNL और MTNL करेगी कर्मचारियों की छंटनी, इन पर पड़ेगा असर

Updated on: 16 September, 2019 04:41 AM
सरकारी दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल और एमटीएनएल को आर्थिक संकट से उबारने की कवायद के तहत बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी हो सकती है। कंपनी बोर्ड ने इसके लिए कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की पेशकश संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। सूत्रों के मुताबिक दूरसंचार मंत्रालय इस प्रस्ताव पर कैबिनेट नोट लाने के लिए चुनाव आयोग से मंजूरी मांगने की तैयारी कर रहा है। सरकार के एक शीर्ष अधिकारी ने बुधवार को बताया कि बीएसएनएल और एमटीएनएल के 50 साल से ऊपर के कर्मचारियों के लिए वीआरएस की की सिफारिश होगी। बीएसएनएल के कर्मचारियों की संख्या 1.76 लाख जबकि एमटीएनएल में 22,000 कर्मचारी हैं। पांच साल में एमटीएनएल के 16,000और बीएसएनएल के 50% कर्मचारी सेवानिवृत्त होंगे। दोनों दूरसंचार कंपनियों ने कर्मचारियों को गुजरात मॉडल के आधार पर वीआरएस देने का आग्रह किया है। इसके तहत कर्मचारियों को पूरा किए गए प्रत्येक सेवा वर्ष के लिये 35 दिन और बचे हुए सेवा वर्ष के लिए 25 दिन का वेतन की पेशकश की जाएगी। एमटीएनएल के मामले में वेतन अनुपात 90 प्रतिशत पहुंच गया है जबकि बीएसएनएल के मामले में यह करीब 60 से 70 प्रतिशत है। इस योजना में कितने कर्मचारी आएंगे, अधिकारी ने कहा कि 50 साल से ऊपर के सभी कर्मचारी आएंगे। वेतन खर्च बढ़कर 90 प्रतिशत तक पहुंचा बीएसएनएल और एमटीएनएल के लिये वीआरएस से क्रमश: 6,365 करोड़ रुपये तथा 2,120 करोड़ रुपये का प्रभाव पड़ सकता है। विभाग वीआरएस के वित्त पोषण के लिए 10 साल का बांड जारी करेगा। कंपनी बांड का भुगतान भूखंडों को बाजार से चढ़ाने से प्राप्त पट्टा आय के जरिए करेगी। हालांकि, इसके तहत कितने कर्मचारी आएंगे इसका वास्तविक संख्या का निर्धारण अभी नहीं किया गया है।
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