यूपी में BJP ने अब तक नहीं घोषित किए हैं 8 उम्मीदवार, ये है वजह

Updated on: 19 November, 2019 06:46 AM
यूपी (UP) की 80 लोकसभा सीटों (Lok Sabha Seats) पर अब तक 70 उम्मीदवार घोषित करने के बाद बीजेपी (BJP) के केन्द्रीय नेतृत्व के कदम अब थोड़ा ठिठक गए हैं। इनमें दो सीटें मिर्जापुर और राबर्टसगंज (सु.) तो सहयोगी दल अपना दल के खाते में चली गई हैं। अब जो 8 सीटें हैं, उनमें कुछ सीटों पर टिकट तय करने को लेकर नेतृत्व को 'अपनों' से ही जूझना पड़ रहा है। इसके अलावा कुछ सीटें निषाद पार्टी सरीखे सहयोगियों को दिए जाने पर मंथन पर चल रहा है। इन 8 लोकसभा सीटों में प्रतापगढ़, अम्बेडकर नगर, संत कबीरनगर, जौनपुर, भदोही, गोरखपुर, देवरिया और घोसी शामिल हैं। इनमें से दो सीट नए सहयोगी बनी निषाद पार्टी के पास जा सकती हैं। इनमें भदोही, अम्बेडकरनगर या जौनपुर हो सकती हैं। प्रतापगढ़ में उपयुक्त प्रत्याशी की तलाश: देवरिया सीट पर कलराज मिश्र वयोवृद्ध होने के कारण शायद ही इस बार टिकट पाएं, कलराज मिश्र के स्थान पर उनके जैसे बड़े कद के प्रत्याशी को ढूंढा जा रहा है। प्रतापगढ़ में रघुराज प्रताप सिंह 'राजा भैया' ने अपनी पार्टी से अक्षय प्रताप सिंह को प्रत्याशी बनाया है। ये वही रघुराज प्रताप सिंह हैं, जिन्होंने विधान परिषद और राज्यसभा में बीजेपी प्रत्याशियों को जिताने में मदद की थी। यहां भी प्रत्याशी उतारने के लिए बीजेपी नेतृत्व को सभी बातों पर विचार करना पड़ रहा है। झांसी से सांसद उमा भारती के चुनाव लड़ने से इनकार करने पर काफी जद्दोजहद के बाद पार्टी नेतृत्व ने झांसी से अनुराग शर्मा को मैदान में उतार दिया, लेकिन मुख्यमंत्री के लिए प्रतिष्ठा बनी गोरखपुर सीट से प्रत्याशी तय करने में नेतृत्व को सभी कोणों को देखने पड़ रहा है। शरद त्रिपाठी के टिकट पर गहन विचार-विमर्श संतकबीर नगर में मौजूदा सांसद शरद त्रिपाठी अपनी ही पार्टी के विधायक के साथ जूतम पैजार के लिए चर्चित हो गए। अब सांसद को दोबारा संतकबीर नगर से टिकट दिया जाए या नहीं या फिर उनकी संसदीय सीट बदल दी जाए। इस पर विचार होने के साथ संतकबीर नगर में शरद के विकल्प की भी तलाश है। घोसी संसदीय सीट पर किसी सहयोगी दल को अपने प्रत्याशी के तौर पर उतारने पर मंथन जारी है।
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