आयकर विभाग की छापेमारी को लेकर चुनाव आयोग और राजस्व विभाग में तनातनी

Updated on: 22 April, 2019 02:34 AM
चुनाव में कालेधन के इस्तेमाल और उस पर आयकर विभाग की छापेमारी को लेकर चुनाव आयोग और वित्त मंत्रालय के बीच तल्खी पैदा हो गई है। चुनाव आयोग ने राजस्व सचिव को पत्र लिखकर कहा था कि चुनाव में अवैध धन के रोकथाम के लिए निष्पक्ष और भेदभाव रहित कार्रवाई होनी चाहिए। जिसके जवाब में राजस्व विभाग ने कहा कि उन्हें यह पता है। और जब भी किसी के खिलाफ कोई सूचना मिलेगी तो कार्रवाई की जाएगी। दरअसल, चुनाव आयोग की तरफ से सात अप्रैल को भेजे गए पत्र में चुनाव में अवैध धन के इस्तेमाल के खिलाफ कार्रवाई की पैरवी तो की गई है। लेकिन राजस्व विभाग के तहत आने वाली एजेंसियों को यह भी सलाह दी गई है कि कार्रवाई पूरी तरह से तटस्थ, पक्षपात रहित और भेदभाव रहित होनी चाहिए। आयोग ने यह भी कहा कि यदि इस बात की पक्की जानकारी हो कि अवैध धन का इस्तेमाल चुनाव में हो रहा है तो इसकी जानकारी मुख्य चुनाव अधिकारी को भी दी जाए। यह व्यवस्था तब तक जारी रहे जब तक आदर्श आचार संहिता लागू है। इस पत्र का आठ अप्रैल को राजस्व विभाग ने चुनाव आयोग को जवाब भेजा है। पत्र से साफ जाहिर है कि राजस्व विभाग को चुनाव आयोग की सलाह जंची नहीं। विभाग ने कहा कि उसे तटस्थ, पक्षपात रहित और भेदभाव रहित शब्दों अर्थ पहले से पता है और इन्हें ध्यान में रखकर ही कार्रवाई की जाती है। जब भी कोई सूचना मिलती है तो तुरंत कार्रवाई की जाती है। यह नहीं देखा जाता है कि वह किस दल के साथ संबद्ध है। विभाग इसे आगे भी जारी रखेगा। राजस्व विभाग ने चुनाव आयोग को सलाह दी है कि वह आदर्श आचार संहिता के क्रियान्वयन के लिए फील्ड में तैनात अपने अधिकारियों को निर्देश दे कि चुनाव में अवैध धन के इस्तेमाल को रोकने के लिए भी कार्य करें। यदि उनके पास कोई विशिष्ट सूचना है तो वे इसकी सूचना राजस्व विभाग को भी दे सकते हैं ताकि विभाग उस पर कार्रवाई करे।
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