वे दिन : किस्सा 1988 का, जब बुलेट मोटर साइकिल से प्रचार करते थे वीपी सिंह

Updated on: 12 November, 2019 05:08 AM
इलाहाबाद सीट पर हुए 1988 में लोकसभा उपचुनाव को आज भी लोग भूल नहीं पाए हैं। कांग्रेस से निकाले जाने के बाद चुनाव लड़ने वाले विश्वनाथ प्रताप सिंह ने पूरा प्रचार बुलेट मोटर साइकिल से किया। उपचुनाव में देश और प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी के सभी दांव विफल हो गए थे। वीपी सिंह का चुनाव-प्रचार करने वाले भी दोपहिया पर चलते थे। चुनाव प्रचार में वीपी के सारथी रामशिरोमणि शुक्ल थे। रामशिरोमणि की बुलेट पर वीपी सिंह गांव-गांव घूमते थे। रामशिरोमणि बताते हैं कि उस समय बुलेट दुरुस्त रखना बड़ी चुनौती थी। प्रचार के बाद रोज रात 1979 मॉडल की बुलेट की जांच के लिए एक मिस्त्री रखा गया था। अमिताभ बच्चन के इस्तीफे के बाद इलाहाबाद सीट पर उपचुनाव हो रहा था। कांग्रेस के बड़े नेता विश्वनाथ प्रताप सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ना नहीं चाहते थे। रामशिरोमणि कहते हैं कि कांग्रेस ने पूर्व प्रधानमंत्री के छोटे पुत्र सुनील शास्त्री को वीपी सिंह के खिलाफ उतार दिया जबकि वीपी को शास्त्री दंपती अपना बेटा मानता था। कांग्रेस ने बड़ा दांव खेला पर वीपी की लोकप्रियता उस वक्त चरम पर थी। इसी चुनाव में लगा नारा ‘राजा नहीं फकीर हैं, देश की तकदीर हैं’ बहुत लोकप्रिय हुआ। वीपी सिंह ने भारी मतों से उपचुनाव जीतकर कांग्रेस के सत्ताहीन होने की बुनियाद रख दी थी। वीपी के सारथी के अनुसार, उनके समर्थन में देश के सभी बड़े नेता यहां आए। सत्तू का घोल पीकर प्रचार होता था। बड़े-बड़े पंडाल की जगह शामियानों में सभा का आयोजन किया जाता था।
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