इंश्योरेंस कंपनियों ने कृषि बीमा भुगतान के 530 करोड़ दबाए, संकट और बढ़ा

Updated on: 05 July, 2020 03:06 AM

इंश्योरेंस (बीमा) कंपनियां फसल बीमा और कृषि संकट से जूझ किसानों का करोड़ों रुपये दबा कर बैठी हैं। सरकार ने पहली बार बीमा कंपनियों पर जुर्माना लगाने के संकेत दिए हैं। आपको बात दें कि हिन्दुस्तान टाइम्स के द्वारा अधिकारिक आंकड़ों की समीक्षा की है।

एचटी की रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर 2018 में एक नए नियम बनाया गया था जो जनवरी 2019 में प्रभावी हुआ। इस नियम के तहत अगर बीमा कंपनियां फसल-बीमा दावों के भुगतान में देरी करती है तो उन्हें जुर्माना देना होगा। कृषि संकट और लोकसभा चुनाव के चलते अब यह एक राजनीतिक मुद्दा बन गया है।

बीमा कंपनियां किसानों के फसल बीमा से जुड़े करोड़ों रुपये दबा कर बैठी हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक फसल बीमा के लिए अधिकृत देश की 18 बीमा कंपनियां किसानों को उनके हक की रकम नहीं दे रही हैं. इससे किसानों की मुसीबत तो बढ़ ही रही है, सरकार को भी बीमा कंपनियों पर जुर्माना लगाना पड़ रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक हाल के सालों में किसानों ने एक के बाद एक जो विरोध-प्रदर्शन किए, उनके पीछे एक बड़ी वजह फसल बीमा मिलने में हो रही देरी भी है.

प्रधानमंत्री आवास बीमा योजना (PMFBY) के तहत इस नए नियम को लाया गया। मौजूदा सरकार की प्रमुख सब्सिडी कृषि बीमा योजना ने समस्या की भयावहता को उजागर किया है। 31 मार्च 2019 तक किसानों का लगभग 530 करोड़ रुपये बकाया है। हालांकि इसमें से कुछ पैसा किसानों को दे दिया गया है।

इस मामले से जुड़े एक व्यक्ति ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया है कि देरी के लिए लगभग आठ कंपनियों पर 16 करोड़ रुपये का जुर्माना लगया गया है। एक बीमा कंपनी को सभी दावों से संबंधित डेटा प्राप्त करने के 30 दिनों के भीतर भुगतान करना चाहिए। अगर वह बीमा कंपनी विफल रहती है तो उस पर बकाया 12% की दर से जुर्माना लगाया जाता है। मौसम की मार के चलते बर्बाद हुई फसलों के मुआवजे का भुगतान करने से व्यक्तिगत किसानों की किस्मत और समग्र अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ सकता है।

इस तरह की देरी लाखों किसानों को गरीबी में धकेल सकती है, जिससे उन्हें अगले बुवाई के मौसम के लिए बहुत कम पैसा मिलेगा। इसके अलावा, इस तरह की देरी से किसानों की कृषि ऋण को चुकाने में बाधा उत्पन्न होती है, जो उन्हें डिफ़ॉल्ट के कगार पर ले जाते हैं। कृषि ऋण लेने वाले किसी भी किसान के लिए कृषि बीमा अनिवार्य है।

देरी से भुगतान के ऐसे दुष्चक्र और अन्य मुद्दों के अलावा पिछले दो वर्षों में किसानों द्वारा कृषि ऋण माफी की मांग को लेकर बड़े पैमाने पर किए गए विरोध प्रदर्शनों के चलते राजनीतिक दलों ने 2019 के चुनावों से पहले किसानों के लिए ऋण माफी की घोषणा की।

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