भारतीय बच्ची के लिए यूएई ने अपभारतीय बच्ची के लिए यूएई ने अपना नियम तोड़ाना नियम तोड़ा

Updated on: 16 October, 2019 11:03 AM

पहली बार संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) सरकार ने एक बच्ची की पहचान के लिए प्रवासियों की शादी के नियम को तोड़ है। इसके तहत सरकार ने भारत के एक हिंदू व्यक्ति और मुस्लिम महिला की नौ माह की बेटी को जन्म प्रमाणपत्र दे दिया।

यूएई में प्रवासियों के लिए शादी के नियम के अनुसार, मुस्लिम पुरुष किसी गैर मुस्लिम महिला से शादी कर सकते हैं, लेकिन मुस्लिम महिला किसी गैर मुस्लिम व्यक्ति से विवाह नहीं कर सकती। शारजाह में रहने वाले किरण बाबू और सनम साबू सिद्दीकी ने 2016 में केरल में शादी की थी। दंपत्ति को तब परेशानी का सामना करना पड़ा जब 2018 में उनकी बेटी का जन्म हुआ। बाबू ने बताया कि बच्ची के जन्म के बाद मेदीवर अस्पताल ने हिंदू होने के कारण जन्म प्रमाणपत्र नहीं दिया।

उन्होंने कोर्ट के जरिए अनापत्ति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया लेकिन केस खारिज हो गया। बाबू ने बताया कि वह भारतीय दूतावास की मदद से फिर कोर्ट गए। इस बार न्यायिक विभाग ने मामले को अपवाद बनाया और 14 अप्रैल को जन्म प्रमाणपत्र मिल गया। बाबू ने बताया कि भारतीय दूतावास के परामर्शदाता एम. राजमुरुगन ने पूरी प्रक्रिया में उनकी मदद की।

नजीर बनेगा फैसला

यूएई में भारतीय दूतावास के परामर्शदाता एम. राजमुरुगन ने बताया कि अदालत का फैसला भविष्य के मामलों के लिए एक नजीर बनेगा। बाबू ने कहा कि मुझे बताया गया है कि यह पहला मामला है जब नियम में संशोधन किया गया है।

2019 सहिष्णुता वर्ष

यूएई ने 2019 को सहिष्णुता वर्ष के तौर पर घोषित किया है। इसके तहत यूएई सहिष्णु राष्ट्र की मिसाल पेश करेगा और अलग-अलग संस्कृतियों के बीच संवाद की कमी पूरी करेगा। सहिष्णु वर्ष घोषित होने के कारण ही  भारतीय दंपति को लाभ मिला।

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