पिता की संपत्ति में बेटी का बेटे जैसा बाराबर हक, कोई मना नहीं कर सकता

Updated on: 16 September, 2019 02:54 AM

आमतौर पर हिन्दू परिवार में पिता की संपत्ति पर बेटे का पूरा अधिकार माना जाता है। लेकिन, हकीकत में ऐसा नहीं है। पिता की संपत्ति पर बेटी का भी बेटा जैसा बाराबर का हक है। सरकार ने हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 में साल 2005 में संशोधन कर बेटियों को पिता के पैतृक संपत्ति में समान हिस्सा पाने का कानूनी अधिकार दिया गया। इस कानून में संशोधन होने से बेटियां अपने पिता की पैतृक संपत्ति में हक ले सकती हैं। और पिता, भाई या दूसरे रिश्तेदार इसको देने से मना नहीं कर सकते हैं।

पैतृक संपत्ति में जन्मसिद्ध अधिकार
हिंदू कानून में संपत्ति को दो श्रेणियों में बांटा गया है, पैतृक और खुद से अर्जित संपत्ति। पैतृक संपत्ति के तहत चार पीढ़ी पहले से अर्जित प्रॉपर्टी आती हैं, जिनका बटवारा नहीं हुआ है। इस तरह की प्रॉपर्टी में बेटी का जन्मसिद्ध अधिकार है। वह प्रॉपर्टी में हिस्सेदारी लेने का दावा कर सकती है। साल 2005 से पहले इस तरह की संपत्ति में सिर्फ बेटों को अधिकार मिलता था। लेकिन काननू में संशोधन होन से अब समान अधिकार बेटियों को भी मिल रहा है। इस तरह की प्रॉपर्टी में हिस्सा देने से पिता भी अपनी बेटी को मना नहीं कर सकते हैं।

खुद से अर्जित संपत्ति पर पक्ष कमजोर
पिता द्वारा खुद की कमाई से अर्जित संपत्ति को लेकर बेटियों का पक्ष कमजोर है। यह पिता की मर्जी पर निर्भर करेगा कि वह अपनी बेटियों को हिस्सेदारी दे या नहीं। अगर वह हिस्सेदारी देना नहीं चाहता है तो बेटी कुछ नहीं कर सकती है। उसके पास कानूनी रूप से उस प्रॉपर्टी में हिस्सा लेने का अधिकार नहीं है।

वसीयत नहीं तो यह है नियम
अगर पिता की मौता बिना वसीयत बनाये हो जाती है तो भी बेटी को उनके पैतृक संपत्ति में समान अधिकार मिलता है। हिंदू उत्तराधिकार कानून में पुरुष उत्तराधिकारियों को चार श्रेणियों में बंटा गया है। इसके तहत पिता की मौत होने पर बेटा, बेटी , विधवा और अन्य लोग आते हैं। यानी बेटी को भी पिता के मौत होने पर बेटै जैसा समान अधिकार मिलता है।

बेटी की शादी हो गई तो क्या
साल 2005 से पहले हिंदू उत्तराधिकार कानून में बेटियों को शादी से पहले तक ही हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) का हिस्सा माना जाता था। लेकिन 2005 में संशोधन के बाद बेटी की शादी होने के बाद भी संपत्ति में समान उत्तराधिकारी माना गया है। यानी बेटी की शादी होने के बाद भी वह पिता की संपत्ति में अपना दावा कर सकती है और हिस्सा ले सकती है।

पैतृक संपत्ति का मतलब
किसी भी पुरुष को अपने पिता, दादा या परदादा से उत्तराधिकार में प्राप्त संपत्ति, पैतृक संपत्ति कहलाती है।

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