रामपुर से आजम खां की जीत तो तय थी, जयाप्रदा की हार के 5 बड़े कारण

Updated on: 19 October, 2019 11:11 AM

नवाब फैजुल्लाह खां द्वारा बसाए गए रामपुर की गिनती तहजीब के शहरों में होती है। जरी-जरदोजी, प्लाईवुड, चीनी मिट्टी व कपड़ों के लिए पहचान रखने वाले रामपुर को नई पहचान आजम ने दी है? वे यहां से नौ बार विधायक चुने गए हैं। 1980 के बाद से कोई ऐसा इलेक्शन नहीं है, जिसमें उनकी सक्रिय भागीदारी न रही हो। 2004 में नवाब परिवार की नूर बानो की सियासी काट के लिए वे अभिनेत्री जयाप्रदा को चुनाव लड़ाने रामपुर लाए थे। हालांकि, जल्द ही जयाप्रदा व उनके सियासी गुरु अमर सिंह से आजम की खटपट शुरू हो गई। 2009 आते-आते आजम सपा से बाहर थे व जया उनके विरोध के बावजूद रामपुर से सांसद चुनी गईं। जया प्रदा तब सपा के टिकट से जीतकर सांसद बनी थीं। सपा से पहले आरएलडी के टिकट पर चुनाव हार चुकी जया प्रदा को भाजपा की टिकट भी रामपुर से जिता न सकी।

 तीन विधानसभा सीट सपा की, दो भाजपा के पास
रामपुर लोकसभा क्षेत्र में पांच विधानसभा सीट हैं। इनमें रामपुर, स्वार व चमरौवा सपा के पास हैं तथा बिलासपुर व मिलक से भाजपा के विधायक हैं। रामपुर से खुद आजम खां और स्वार से उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खां विधायक हैं।

मौलाना अबुल कलाम थे पहले सांसद

रामपुर सीट से 1952 में पहली बार मौलाना अबुल कलाम आजाद सांसद चुने गए थे। वे देश के पहले शिक्षा मंत्री थे। यहां से कांग्रेस को 10 बार, भाजपा को तीन, सपा को दो व भारतीय लोकदल को एक बार सफलता मिली है। लंबे समय बाद यह पहला मौका है जब नवाब परिवार का कोई सदस्य चुनाव नहीं लड़ रहा है। इस परिवार के जुल्फिकार अली खां उर्फ मिक्की मियां यहां से पांच बार और उनकी पत्नी नूर बानो दो बार सांसद रही हैं। 2014 में उनके बेटे नवाब काजिम अली खां कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में तीसरे स्थान पर रहे थे।

2014 का लोकसभा परिणाम
प्रत्याशी                       मिले मत 
नैपाल सिंह  (भाजपा)            3,58,616
नसीर अहमद खान (सपा)         3,35181
काजिम अली खां (कांग्रेस)         1,56,466
अकबर हुसैन (बसपा)             81006

51% वोटर मुस्लिम हैं रामपुर में
रामपुर सीट का समीकरण भाजपा के बहुत मुफीद नहीं है, फिर भी 2014 में भाजपा के डॉ. नैपाल सिंह ने सपा के नसीर अहमद खां को 23 हजार मतों से हराया था। 1991 और 1998 में भी भाजपा इस सीट को जीत चुकी है। रामपुर में करीब 51 फीसदी वोटर मुस्लिम हैं। भाजपा ने यहां पूरी ताकत झोंकी थी। इसके साथ ही उन्हें परंपरागत वोटों के साथ मुस्लिम व दलितों में सेंधमारी की उम्मीद थी। 

1996 से अब तक के सांसद
1996    बेगम नूरबानो                कांग्रेस
1998    मुख्तार अब्बास नकवी    भाजपा
1999    बेगम नूरबानो                कांग्रेस
2004    जयाप्रदा                        सपा
2009    जयाप्रदा                        सपा
2014    डॉ. नैपाल सिंह              भाजपा

लोगों का आजम पर कायम था भरोसा
चुनावी चर्चा के दौरान लोगों ने भी माना था कि जयाप्रदा रामपुर से टक्कर जरूर दे सकती है, लेकिन जीतेंगे आजम खां। रजा डिग्री कॉलेज से पीजी कर रहे मुर्तजा कहते हैं कि आजम खां का कुछ लोगों में विरोध भी है लेकिन वह रामपुर की पहचान हैं। नौ बार के विधायक हैं, उन्होंने विकास कराया है। शाहाबाद गेट के आदिल भी उनसे इत्तेफाक जताते हैं। प्लाईवुड फैक्ट्री में काम करने वाले शिवशंभू सिंह भाजपा की पैरोकारी करते हैं। बिलाफिर गेट निवासी जुनेद को लगता है कि जयाप्रदा के आने से मुकाबला रोचक हुआ, लेकिन आजम का पलड़ा भारी है।

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