सुरक्षित मातृत्व स्वास्थ्य सेवाये मिलना हर महिला का अधिकार ग्राम्या संस्थान

Updated on: 17 October, 2019 02:11 PM

15 दिवसीय अभियान का हुआ आगाज 28 मई महिला स्वास्थ्य पर अन्तर्राष्ट्रीय कार्य दिवस के उपलक्ष्य में-
चकिया/चन्दौली मंगलवार को स्थानीय ब्लाक सभागार में 28 महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए अंतर्राष्ट्रीय कार्य दिवस के रूप में मनाया गया है, जिसे पिछले 30 से अधिक वर्षों से, प्रजनन व यौन स्वास्थ्य एवं अधिकार के आन्दोलन से जुड़े महिलाओं के अधिकारों की पैरोकारी करने वालों और सहयोगी दलों ने विश्व स्तर पर विभिन्न तरीकों से मनाया है| साल दर साल, महिलाओं, लड़कियों और सहयोगियों ने प्रजनन और यौन स्वास्थ्य अधिकारों के लिए कार्य जारी रखा है और इन अधिकारों के मूल मायनों, जो मानव अधिकारों का एक अंग है, के लिए खड़े रहे हैं ।
आज, ऐसे समय में जब महिलाओं के मानवाधिकारों और विशेष रूप से यौन और प्रजनन अधिकारों का दुनिया भर में व्यवस्थित रूप से उल्लंघन जारी है, तो हमारे समुदायों के सभी लोगों का भी लामबंद होना आवश्यक है ताकि हमारे अधिकारों को वापस लिए जाने की स्थिति में संम्वाद किया जा सके | हम महिलाओं के अधिकारों हानि पहुँचाने वाले किसी भी प्रयास की निंदा करें ताकि हम अपने शरीर के सभी पहलुओं, हमारी यौनिकता और हमारे जीवन के बारे में निर्णय ले सकें जो कि दबाव, भेदभाव व हिंसा से मुक्त हो |
ग्राम्या संस्थान की निदेशक बिंदु सिंह ने बताया कि
“भारतीय जन स्वास्थ्य मानक “ राष्ट्रिय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत मानकों का एक वह ढांचा है, जो स्वास्थ्य सेवायों की गुणवत्ता को बेहतर बनाने की दूरदर्शिता रखता है | यह मानक जन-स्वास्थ्य सुविधाओ जैसे – उप स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिकस्वास्थ्य केंद्र व जिला अस्पताल के लिए मुख्यतःमानव संसाधनआवश्यक दवाईयों, उपकरणों व आधारभूत सुविधाये आदि जिनकी स्वस्थ्यकेन्द्रों पर जरूरत होती है,उनके लिए न्यूनतम मापदंड तय करता है |
उत्तर प्रदेश में कई सरकारों ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में मंत्रियों का कहना रहा है कि उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को भ्रष्टाचार मुक्त बनाया जायेगा | इसके लिए सरकार के द्वारा कई प्रयास किये गए है जैसे – सबसे निचले पायदान पर वी०एच०एन०डी० और इसके बाद उप- स्वास्थ्य केंद्र, पी०एच०सी०, सी०एच०सी० व अन्य कार्यक्रम और योजनाए भी चलाई गई – जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम व जननी सुरक्षा योजना आदि | लेकीन आज भी भारतीय जनस्वास्थ्य मानक के आधार पर देखते हुए सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों की स्थिति सोचनीय है और साथ ही संसाधनों की कमी भी दिखती है |

नीतू सिंह ने बताया कि भारत सरकार द्वारा लागू किये गए 2005 में जननी सुरक्षा योजना के तहत अस्पतालों में प्रसव हेतु प्रोत्साहन राशि(शहरी क्षेत्र में 1000 व ग्रामीण क्षेत्र में1400 रु०) देने की घोषणा की गयी थी | इसके कुछ समय बाद प्रसव के दौरान व बाद में होने वाले सभी प्रकार के खर्चो को कम करने के लिए जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम की घोषणा की गई जिसमे सभी मातृ स्वास्थ्य के सेवाये सरकार द्वारा मुफ्त दिया जाना है |
जबकि गरीब व पिछड़े क्षेत्र की महिलाये विशेष तौर पर प्रसव के लिए जाती है तो अस्पतालों में उनसे या उनके घरवालों के साथ ख़राब व्यहवार होना, समय पर सही इलाज न मिलाना, बिना कारण व दस्तावेजों को रेफर करना और सबसे अधिक अनावश्यक पैसों की मांग की जाती है | गांवों में सबसे ज्यादा पैसों की मांग मरीज को अस्पताल में भर्ती कराने व उनके खाने के लिए किया जाता है | इसके अलावा ओ.ओ.पी.ई. (OUT OF POCKET EXPENSES) एक बड़ा मसला है, जिसमे दवाई, जाँच, दस्ताना  आदि पर भी काफी खर्च करना पड़ता है और इसमें 500 रु0 से ऊपर तक खर्च करने पड़ते है और जिसके लियेउन्हें कई बार कर्ज भी लेना पड़ जाता है | हर साल भारत में लगभग में 4 करोड़ जनता स्वास्थ्य में इस तरह के खर्च की वजह से गरीबी रेखा के नीचे चले जाते है|
“ महिला स्वास्थ्य अधिकार मंच ”* जमीनी स्तर का महिलाओका फोरम है जिसमे उत्तर प्रदेश में 11000 गरीब, ग्रामीण व वंचित महिलाये जुडी है | यह मंच पिछले 13 सालों से महिला स्वास्थ्य व विभिन्न जुड़े मुद्दों पर माहिलाओ के अधिकारों की निगरानी व उनकी पैरोकारी करती आ रही है | 

महिला स्वास्थ्य अधिकार मंच की महिला ने अपना अनुभव बताया कि..आज  भी प्रसव के दौरान पैसा लिया जाता है अगर आप एम्बुलेंस को पैसा नजी देंगे तो वह भी नही ले जाता है चकिया के हर गांव की यही कहानी है बिना पैसा लिए कोई भी सुविधा नही मिलता है। कार्यक्रम का संचालन नीतू द्वारा किया गया और अंत में हमारी 15 दिवसीय अभियान के बारे में बताया (28 मई से 12 जून 2019) और सभी का धन्यवाद देकर अपनी मांगों को पढने के बाद कार्यक्रम  समाप्त किया |

 हमारी मांगे -
    1-    समुदाय की हर महिला को मातृत्व स्वास्थ्य की गुद्वात्तापरक  सेवाये मिलाना सुनश्चित किया जाए |
    2-    स्वास्थ्य केन्द्रों पर सुविधाओं के मापदंड के अनुसार अपडेट और नियमित किया जाये |
    3-    सरकारी अस्पतालों में अनौपचारिक नाजायज पैसों का लिया जाना बंद किया जाये |

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