ताजमहल की मुख्य मीनारों से गिर रहे काले पत्थर

Updated on: 19 October, 2019 11:03 AM

‘बहुत करीने से बनवाया था ताज के हर हिस्से को
 क्या मालूम था कि वक्त के साथ मिट जाएंगे सारे निशां’

कुछ ऐसा ही इन दिनों ताजमहल में देखने को मिल रहा है। मोहब्बत की ये निशानी खुद ही मोहब्बत से महरूम दिखाई पड़ रही है। ताजमहल की शोभा उसके गुंबद और मुख्य चारों मीनारों से है। लेकिन मीनारों में लगे काले पत्थर इन दिनों सफेद संगमरमर का साथ छोड़ रहे हैं। संरक्षण के अभाव में इसकी खूबसूरती खोती जा रही है।

ताजमहल के हर हिस्से में आए दिन संरक्षण का काम चलता रहता है, लेकिन सही तरह से देखभाल न होने के कारण इसकी खूबसूरती पर दाग लग रहे हैं। कुछ महीनों पहले ताज की मीनारों का संरक्षण कार्य कराकर इसके टूटे पत्थरों को बदला गया था। पीले पड़ रहे पत्थरों को चमका दिया गया था। लेकिन मीनारों में लगे मुगलकालीन पत्थरों को सहेजने के लिए किए गए प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। मीनारों में लाल रंग का रतक, हरे रंग का पितौनिया, मद्रास से लाया गया काला और मकराना का सफेद पत्थर लगा हुआ है। सफेद पत्थरों को आकर्षक बनाने के लिए इनके बीच में काले पत्थरों को तराशकर उनकी लंबी-लंबी पट्टियां लगाईं गईं है।

गर्मी आते ही काले पत्थरों की ये पट्टियां नीचे गिरने लगी हैं। इससे मीनारों में पड़ी दरारों को साफ देखा जा सकता है। यही नहीं मीनार से टूटकर गिरे ये पत्थर उठाने वाला भी कोई नहीं है। रोज आठ दस पत्थर मीनार का साथ छोड़कर नीचे गिर रहे हैं। इससे जहां ताज की खूबसूरती पर दाग लग रहे हैं वहीं पुरातत्व विभाग द्वारा हाल ही में मीनारों के किए गए संरक्षण पर भी सवाल उठ रहे हैं।

फिर से लगवायेंगे पत्थर: अधीक्षण पुरातत्वविद
अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. वसंत कुमार स्वर्णकार का कहना है कि मीनार से गिरने वाले पत्थरों को फिर से लगवा दिया जाएगा। कुछ पत्थर सही तरह से फिट होने से रह गए होंगे। इसलिए साथ छोड़ गए। जिसके लिए नया प्रस्ताव बनाकर मुख्यालय को भेजा जाएगा। उनका कहना है कि संरक्षण कार्य में किसी तरह की लापरवाही नहीं होने दी जाएगी।

सूर्य की रोशनी में चमकते हैं पत्थर
सूर्य की रोशनी में मीनारों पर लगे पत्थर चमकते हैं और ताज की खुबसूरती को और बढ़ा देते हैं। । सूर्योदय में ताज देखने आने वाले पर्यटक इन चमकते पत्थरों को अपने कैमरों में कैद कर ले जाते हैं।

मीनारों की खासियत
ताज के मुख्य गुंबद के चारों कोनों पर चार विशाल मीनारें स्थित हैं। प्रत्येक मीनार 40 मीटर ऊंची है। चारों मीनार दो-दो छज्जों द्वारा तीन समान भागों में बंटी हैं। पुराने समय में यहीं से मस्जिद में नमाज के लिए अजान लगाई जाती थी।  मीनार के ऊपर अंतिम छज्जा है, जिस पर मुख्य इमारत के समान ही छतरी बनी हैं। इन मीनारों में एक खास बात है कि यह चारों बाहर की ओर हलकी सी झुकी हुईं हैं, जिससे कभी गिरने की स्थिति में यह बाहर की ओर ही गिरें जिससे मुख्य इमारत को कोई क्षति न पहुंच सके।

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