हनी ट्रैप में फंसाकर सैन्य जासूसी का नेटवर्क बना रही आईएसआई

Updated on: 22 September, 2019 06:04 AM

भारत में सैन्य जासूसी का नेटवर्क खड़ा करने के लिए पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई इस समय हनी ट्रैप का सहारा ले रही है। ऐसे कई मामलों का खुलासा होने के बाद यूपी एटीएस समेत देश की कई सुरक्षा एजेंसियां चौकन्ना हो गई हैं। गुजरात के भुज में पकड़े गए दोनों संदिग्धों का कनेक्शन भी सैन्य जासूसी से ही है। गहन जांच पड़ताल के बाद इसका खुलासा किए जाने की संभावना है।

खुफिया एजेंसियों की अब की जांच से पता चला है कि सोशल मीडिया प्लेटफार्म खासकर फेसबुक पर सेना के जवान महिलाओं के ऐसी फर्जी फेसबुक अकाउंट से जुड़ जाते हैं जो मूल रूप से पाकिस्तान से संचालित होते हैं। चैटिंग करते-करते वे प्रभावित होकर वाट्सअप कॉल या दूसरे माध्यमों से बातचीत करने लगते हैं। इसी बातचीत में वे सेना की खुफिया जानकारी देने लगते हैं। कुछ मामलों में तो इन जानकारियों के बदले आईएसआई की तरफ से पैसे दिए जाने का खुलासा भी हुआ। अभी हाल ही में यूपी एटीएस के इनपुट पर मिलिट्री इंटेलीजेंस ने बबीना (झांसी) व वर्धा (महाराष्ट्र) से दो सैन्यकर्मियों को गिरफ्तार किया था। लांस नायक व सूबेदार स्तर के ये दोनों सैन्यकर्मी हनीट्रैप में फंसकर आईएसआई को सेना की गोपनीय सूचनाएं दे रहे थे। दोनों को भुज (गुजरात) के दो व्यक्तियों से पैसे मिल रहे थे। 

फैजाबाद से पकड़ा गया था पाक का जासूस

यूपी एटीएस ने इससे पहले तीन मई 2017 को फैजाबाद से आईएसआई के एजेंट आफताब अली को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में पता चला था कि वह नई दिल्ली स्थित पाकिस्तानी दूतावास से भी जुड़ा हुआ है। एक अन्य संदिग्ध को भी हिरासत में लिया गया है। उस समय एटीएस को ऐसी सूचना मिली थी कि भारत में सेना के गतिविधियों की जानकारी पाकिस्तान दूतावास के इंटेलिजेंस अधिकारियों व आईएसआई को भेजी जा रही है। एटीएस ने इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस पर लगातार निगाह रखते हुए मिलिट्री इन्टेलीजेन्स फैजाबाद व यूपी इंटेलीजेंस की विशेष शाखाओं के सहयोग से आफताब अली को फैजाबाद से ही गिरफ्तार किया था। बाद में यह भी पता चला कि आफताब ने पाकिस्तान में आईएसआई  से जासूसी का प्रशिक्षण भी लिया हुआ है। 

शारजाह से खाते में भेजे गए थे पैसे

राजस्थान पुलिस की सूचना पर यूपी एटीएस ने अगस्त 2016 में जमालुद्दीन को गिरफ्तार किया था। बाद में राजस्थान पुलिस उसे लेकर जयपुर चली गई थी। जमालुद्दीन से पूछताछ में एटीएस को कई चौंकाने वाली जानकारी मिली थी। पता चला था कि जमालुद्दीन के पाकिस्तान व संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में काफी संपर्क हैं। जमालुद्दीन के नंबर से पाकिस्तान के नंबरों का संपर्क था और उसकी आईडी से वेस्टर्न यूनियन से करीब छह बार में शारजाह (यूएई) से कुल 1,45,629 रुपये प्राप्त किए गए। पूछताछ में पता चला था कि आईएसआई भारत व विदेशों में बैठे अपने एजेंटों के माध्यम से हवाला व वेस्टर्न यूनियन के माध्यम से उनके खाते पैसा जमा कराता है। यही एजेंट टारगेट पूरा करने वाले व्यक्ति के खाते में पैसा जमा कराना है। ऐसा ही एक मामला झांसी में सामने आया था। भारतीय सेना से संबंधित गोपनीय सूचनाएं पाकिस्तानी जासूसी एजेंटों को देने के मामले में झांसी के एसडीएम सदर के स्टेनो पद पर कार्यरत रहे राघवेन्द्र अहिरवार दोषी पाया गया था। खुद को मेजर यादव बताने वाला एक शख्स उससे टेलीफोन पर सूचनाएं ले रहा था।

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