डाक्टर रीना की मौतः सीसीटीवी फुटेज के बाद परिस्थितियां भी हत्या की और कर रहीं इशारा

Updated on: 17 October, 2019 02:14 PM

सीसीटीवी फुटेज के बाद परिस्थितियां भी डाक्टर रीना सिंह की हत्या की तरफ इशारा कर रही हैं। रीना के ससुराल वालों ने सीढी से गिरकर मौत बताया था। बाद में सुसाइड बताया गया। जबकि टैगोर टाउन स्थित घर पर जिस जगह डॉ. रीना गिरी थीं, वहां पर कोई सीढ़ी नहीं है। घटनास्थल को देखने से पता चलता है कि यहां से कोई छलांग लगाएगा तो वह सीधे बाउंड्री से बाहर आ जाएगा। लेकिन सीसीटीवी फुटेज में दिखा कि डॉ. रीना बाउंड्री के अंदर गिरीं। यही नहीं पहले, दूसरे व अंतिम मंजिल पर जो रेलिंग बनी है, उसको पार करके किसी महिला का कूदना संभव नहीं लगता। पहली मंजिल पर रेलिंग के पास लगाया गया पर्दा भी फटा हुआ है। पहली ही मंजिल पर डॉ. रीना व आलोक रहते थे।

कैंट थाना क्षेत्र के टैगोर टाउन में दो जुलाई की सुबह स्त्री रोग विशेषज्ञ  डॉ. रीना की संदिग्ध परिस्थिति में मौत की जानकारी दी गई थी। डॉ. रीना की मौत को हत्या बताते हुए उनके पिता रंगनाथ सिंह ने गुरुवार को पति, सास अौर ससुर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। मुकदमे के 24 घंटे बाद भी पुलिस ने किसी की गिरफ्तारी नहीं की। वह जांच की बात कहती रही। पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट तो मिली है लेकिन उसे पढ़ नहीं पा रही है। कैंट इंस्पेक्टर राजीव सिंह के अनुसार अभी जो पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई है, उसमें लिखे हुए शब्द साफ नहीं हैं। रिपोर्ट की मूल कॉपी मिलने पर मौत का कारण पता चल सकेगा। इंस्पेक्टर का कहना है कि जांच में हत्या व आत्महत्या की स्थिति साफ होने के बाद ही गिरफ्तारी होगी। फिलहाल मौके से जो सुसाइड नोट मिला है, उस पर हैंड राइटिंग किसकी है, यह जांच की जा रही है।

रीना का मोबाइल भी गायब
पुलिस की मानें तो डाक्टर रीना का मोबाइल फोन भी गायब है। इसे लेकर पिता रंगनाथ सिंह ने कैंट थाने में तहरीर दी है। पिता ने आशंका जताई है कि यदि रीना का मोबाइल पुलिस जब्त नहीं करती है तो उनके पति डॉ. आलोक सिंह मोबाइल से सारे साक्ष्यों को नष्ट कर देगा। परिजनों ने डॉ. आलोक की जल्द गिरफ्तारी की मांग भी की है। पुलिस का दावा है कि डॉ. रीना व डॉ. आलोक के मोबाइल की कॉल डिटेल खंगाल रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि दोनों किससे-किससे बातें करते थे। कहीं झगड़े की वजह कुछ और भी तो नहीं थी? डॉ. रीना ने एक जुलाई की रात पिता को फोन किया था तो उनमें कितनी देर तक बात हुई थी?

डाक्टर आलोक के चेहरे पर नहीं थी शिकन
डॉ. आलोक के पड़ोस में रहने वाले एक प्रत्यक्षदर्शी ने पहचान उजागर न करने की शर्त पर बताया कि दो जुलाई की सुबह छह बजे जब वह अपनी बालकनी में पेपर लेने के लिए आए तो डॉ. रीना नीचे अचेत हालत में पड़ी हुई थीं। इसी दौरान डॉ. आलोक भी घर के अंदर से मोबाइल पर बात करता हुआ निकला। डॉ. रीना को गिरा हुआ देखने के बाद भी उसके चेहरे पर शिकन नहीं दिखी। उसने एक व्यक्ति से मदद मांगी और गाड़ी में डालकर अस्पताल ले गया। डॉ. आलोक का किसी भी पड़ोसी से अच्छा संबंध नहीं था। इस कारण लोगों को घर के अंदर होने वाली गतिविधि के बारे में भी नहीं पता है। डॉ. रीना भी घर से कम निकलती थीं। इसलिए किसी का डॉ. आलोक के परिवार से कोई सम्पर्क नहीं था।

आएएस एमपी सिंह पर जांच प्रभावित करने का आरोप
डॉ. रीना के चाचा कैंट क्षेत्र के रमरेपुर निवासी मंगरु सिंह ने आरोप लगाया कि डॉ. आलोक के बहनोई आईएएस अधिकारी एमपी सिंह के दबाव में जिले के कई प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी जांच को हल्का करने में लगे हैं। यही वजह है कि तहरीर में एमपी सिंह का नाम होने के बाद भी उनके खिलाफ केस दर्ज नहीं है। साथ ही हत्या का मामला दर्ज होने के बावजूद अब तक आलोक की गिरफ्तारी नहीं हुई है। डा. रीना के चचेरे भाई आलोक सिंह उर्फ बब्बू ने पूरे मामले की किसी एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। वह संबंध में वह एडीजी बृजभूषण से भी मिलेंगे।

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