हत्या के आरोपी भारतीय मूल के दंपती को प्रत्यर्पित करने से ब्रिटेन का इनकार

Updated on: 10 December, 2019 10:36 AM

शराब कारोबारी विजय माल्या को प्रत्यर्पण आदेश के खिलाफ यूके हाई कोर्ट में अपील करने की इजाजत मिलने के बाद भारत को उस वक्त एक और झटका लगा, जब यहां की एक अदालत ने हत्या के एक मामले में एक भारतीय दंपती के प्रत्यर्पण के लिए भारत के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया। भारतीय बैंकों के 9,000 करोड़ रुपये के बकाये की धोखाधड़ी और धन शोधन के आरोपी माल्या (63) ने अपने मामले में दूसरा मौका मिलने का स्वागत किया है। दरअसल, यूके हाईकोर्ट ने भारतीय अधिकारियों द्वारा पेश किए गए प्रथम दृष्टया मामले के आधार पर किंगफिशर एयरलाइन (अब बंद हो चुकी) के पूर्व मालिक माल्या को उन्हें भारत के हवाले किए जाने के आदेश के खिलाफ अपील की इजाजत दी थी।

इस बीच उसी दिन, दो जुलाई को वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट अदालत की मुख्य मजिस्ट्रेट एम्मा आर्बुथनॉट ने भारतीय मूल की ब्रिटिश नागरिक आरती धीर और उनके पति कवल रायजादा से जुड़े एक मामले में अपना फैसला सुनाया था। यह दंपती भारत में अपने 11 वर्षीय दत्तक पुत्र गोपाल और एक करीबी रिश्तेदार की हत्या के मामले में वांछित है। संयोग से न्यायाधीश आर्बुथनॉट वही न्यायाधीश हैं, जिन्होंने दिसंबर 2018 में माल्या के खिलाफ प्रत्यर्पण के समर्थन में अपने फैसले में प्रथम दृष्टया एक मामला पाया था।

न्यायाधीश आर्बुथनॉट ने मानवाधिकारों पर यूरोपीय समझौते के अनुच्छेद तीन के तहत मानवाधिकारों के आधार पर धीर और रायजादा को प्रत्यर्पण से राहत प्रदान कर दिया। इस दंपती के खिलाफ अपने दत्तक पुत्र गोपाल सेजानी और करीबी रिश्तेदार हरसुखभाई करदानी की भारत में फरवरी 2017 में हत्या करने का आरोप है। गुजरात पुलिस की जांच में दावा किया गया था कि आरोपियों ने गोपाल की हत्या की साजिश रची और उसकी हत्या करने से पहले उसका लगभग 1.3 करोड़ रुपये का बीमा कराया था।

न्यायाधीश आर्बुथनॉट ने कहा, ''मेरी जानकारी के अनुसार अगर धीर और रायजादा को प्रत्यर्पित किया गया तो उन्हें नहीं बदले जा सकनी वाली सजा मिल जाएगी, जो अमानवीय और अनुचित होगा। यह अनुच्छेद 3 का उल्लंघन होगा।" धीर और रायजादा को जून 2017 में ब्रिटेन में एक वारंट पर गिरफ्तार किया गया था और उन्हें सशर्त जमानत पर रिहा किया गया था।

लंदन में रहने वाले इन दोनों ने कथित रूप से गोपाल को गोद लिया था और उसका जीवन बीमा कराया था। इसके बाद उसकी हत्या की साजिश रची। राजकोट के निकट 11 फरवरी 2017 में गोपाल पर हमला किया गया जिससे उसकी मौत हो गई। करदानी ने गोपाल को बचाने का प्रयास किया और इस दौरान उस पर भी चाकू से वार किया गया और कुछ दिन बाद उसकी भी मौत हो गई।

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