सुप्रीम कोर्ट के सिर्फ सात जजों ने किया संपति का खुलासा

Updated on: 19 October, 2019 04:17 PM

सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ सात जजों ने ही अपनी संपत्ति और दायित्वों का खुलासा किया है, ,जबकि सर्वोच्च अदालत में 31 जज हैं जो पूर्ण संख्या है। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के अलावा जस्टिस एसए बोब्डे, एनवी रमना, अरुण मिश्रा, एएम खानिवल्कर और जस्टिस अशोक भूषण ने सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर अपनी संपत्तियों का ब्योरा साझा किया है।

वर्ष 2009 में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन ने एक प्रस्ताव पारित कर जजों से कहा था कि वे अपनी संपत्तियों का ब्योरा कोर्ट की वेबसाइट पर डालें। हालांकि, जजों से कहा गया था कि यह कवायद स्वैच्छिक होगी उन्हें यह ब्योरा डालना आवश्यक नहीं होगा। 2009 से लेकर सुप्रीम कोर्ट में रहे 51 जजों में से 49 की संपत्ति का ब्योरा सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर है। लेकिन उसके बाद से यह संख्या कम होती चली जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह प्रस्ताव 2009 में दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद आया था। हाईकोर्ट ने सीआईसी के फैसले को सही ठहराते हुए जजों को अपनी संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि मुख्य न्यायाधीश का कार्यालय सार्वजनिक प्राधिकार है। इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने सर्वोच्च अदालत में चुनौती दी। यह मामला पहले तीन जजों की पीठ के पास रहा और बाद में इसे संविधान पीठ को सौंपा गया। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की पीठ ने पिछले दिनों अप्रैल में इस मामले में सुनवाई कर फैसला सुरक्षित रख लिया था।

सुप्रीम के जजों के अपनी संपत्ति सार्वजनिक करने का प्रस्ताव मई 1997 में जस्टिस जेएस वर्मा लाए थे। लेकिन इस पर अमल नहीं हुआ और यह यूं ही पड़ा रहा। जब पारदिर्शता के दबाव में 2009 में जजों ने संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक करना शुरू किया तो जस्टिस बालाकृष्णन ने कहा था कि यह 1997 के प्रस्ताव के तहत ही किया जा रहा है।

ब्योरा साझा
* मुख्य न्यायाधीश गोगोई ने भी अपनी संपत्तियों का ब्योरा साझा किया।
* सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर सभी सात जजों ने डाला ब्योरा।

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