'राज्यपाल वापस जाओ' नारे के बीच बहुमत साबित करने की समय-सीमा खत्म

Updated on: 15 November, 2019 04:59 PM

कर्नाटक विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए राज्यपाल की तरफ से तय की गई दोपहर 1:30 बजे की समय सीमा का मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी पालन नहीं कर पाए। उधर, कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने शुक्रवार को विधानसभा में बहस जारी रखते हुए विश्वासमत के दौरान यह आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी उनकी सरकार को गिराना चाह रही थी। उन्होंने कहा कि सीट मेरे लिए महत्वपूर्ण नहीं है।

राज्यपाल वजुभाई वाला की तरफ से शुक्रवार की दोपहर डेढ़ बजे तक बहुमत साबित करने दी गई समय-सीमा के बाद कुमारस्वामी ने कहा – "मैं यह देखूंगा कि इस प्रयास के बाद आखिर कब तक आप यहां रहते हो।"

इससे पहले, गुरूवार को विधानसभा में गुरूवार को उस वक्त हाई ड्रामा शुरु हुआ जब राज्यपाल वजुभाई वाला का यह आदेश आया कि कुमारस्वामी शुक्रवार डेढ़ बजे तक अपना बहुमत साबित करे। राज्यपाल वजुभाई वाला की तरफ से मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी को बहुमत साबित करने के लिए शुक्रवार दोपहर डेढ़ बजे का समय दिए जान के बाद हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। बीजेपी ने कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार पर बहुमत साबित करने में जानबूझकर देरी का आरोप लगाते हुए विधानसौदा के अंदर ही रातभर प्रदर्शन किया। वहां पर वे सदन परिसर के अंदर ही खाते और फर्श पर सोते दिखे।

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-विधानसौदा तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है। वोटिंग स्पीकर की तरफ से देरी की गई है जब तक कि इस पर चर्चा पूरी नहीं हो जाती है।

-कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला की तरफ से बहुमत साबित करने के लिए दी गई समय-सीमा खत्म हो गई। उन्होंने स्पीकर केआर रमेश को यह निर्देश दिया था वे आज दोपहर डेढ़ बजे तक फ्लोर टेस्ट कराए।

-मुंबई के अस्पताल में भर्ती कांग्रेस विधायक श्रीमंत पाटिल ने राज्यपाल को लिख पत्र में बताया कि मुझे बीजेपी ने अगवा नहीं किया है। मैं व्यक्तिगत काम से चेन्नई गया था, जहां सीने में दर्द होने पर डॉक्टर के पास गया। डॉक्टर के सुझाव पर मुंबई आकर भर्ती हुआ हूं। इसलिए, विधानसभा सत्र में मौजूद नहीं रह सका। विधानसौदा में स्पीकर केआर रमेश ने केआर रमेश ने सदस्यों को यह जानकारी दी।

-कर्नाटक में जारी राजनीतिक घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में कांग्रेस और सहयोगी दलों के सदस्यों ने शुक्रवार को लोकसभा में हंगामा किया और सत्तारूढ़ भाजपा पर चुनी हुई सरकारों को गिराने का आरोप लगाते हुए सदन से वाकआउट किया।सदन में प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और द्रमुक के सदस्यों ने कर्नाटक के विषय पर चर्चा की मांग करते हुए हंगामा किया। कांग्रेस एवं द्रमुक के सदस्यों ने आसन के निकट पहुंचकर नारेबाजी की।

-विधानसभा में कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि विधायकों को 40-50 करोड़ रूपये की पेशकश की गयी, यह पैसा किसका है। कुमारस्वामी ने भाजपा से पूछा कि अगर वह अपने संख्या बल को लेकर इतनी आश्वस्त है तो उसे विश्वासमत पर चर्चा को एक ही दिन के भीतर खत्म करने की जल्दबाजी क्यों है। कुमारस्वामी ने भाजपा पर दल-बदल रोधी कानून को दरकिनार करने के तरीके अपनाने का आरोप लगाया।


-जद (एस) के विधायक श्रीनिवास गौड़ा ने आरोप लगाया कि सरकार गिराने के लिए उससे अलग होने को लेकर भाजपा की ओर से उन्हें पांच करोड़ रुपये की पेशकश की गई।

-कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष के. आर. रमेश कुमार ने शुक्रवार को उन टिप्पणियों को खारिज कर दिया कि वह मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी की सरकार के भविष्य पर फैसला करने के लिए उनके द्वारा लाए विश्वास मत प्रस्ताव पर मतदान कराने में देरी करने की कोशिश कर रहे हैं।

विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही अध्यक्ष ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी। राज्यपाल वजुभाई वाला ने कुमारस्वामी को अपना बहुमत साबित करने के लिए शुक्रवार को दोपहर डेढ़ बजे की समयसीमा तय की है। कुमार ने विश्वास मत पर मतदान में देरी करने की कोशिश की टिप्पणियों पर आक्रोश जताते हुए कहा, ''मैं पक्षपात नहीं कर रहा हूं। उन्होंने बताया कि ऐसी चर्चा और ''अप्रत्यक्ष टिप्पणियां की गई कि वह प्रक्रिया (विश्वास मत पर मतदान) में देरी कर रहे हैं।

-गुरुवार को कर्नाटक विधानसभा में मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी की ओर से पेश विश्वास प्रस्ताव पर बहस शुक्रवार सुबह तक के लिए स्थगित कर दी गई है। सदन में इस प्रस्ताव पर बहस के दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी नोंकझोक देखने को मिली।

-विधानसभा के उपाध्यक्ष कृष्ण रेड्डी ने भाजपा के खिलाफ कांग्रेस के सदस्यों की नारेबाज़ी की वजह से सदन की कार्यवाही को स्थगित कर दिया। कुमारस्वामी को अभी प्रस्ताव पर अपना भाषण देना है।

-सदन की कार्यवाही स्थगित करने से पहले, भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा ने ऐलान किया कि उनकी पार्टी के सदस्य रातभर सदन में ही रहेंगे और विश्वास प्रस्ताव पर फैसला हो जाने तक सदन में ही डटे रहेंगे।

-येदियुरप्पा ने कहा, '' हम विश्वास प्रस्ताव पर फैसला होने तक रूके रहेंगे। उन्होंने कहा कि विश्वास प्रस्ताव पर ठीक तरह से 15 मिनट भी चर्चा नहीं हुई है और सत्तारूढ़ गठबंधन के सदस्य अन्य मुद्दों को उठा रहे हैं ताकि विश्वास प्रस्ताव पर विलंब कराया जा सके। उन्होंने कहा, '' संवैधानिक रूपरेखा का उल्लंघन हुआ है। येदियुरप्पा ने कहा, '' इसका विरोध करने के लिए हम यहीं सोएंगे।

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