सोनभद्र कांड: एक साथ पहुंचे 10 शवों के बाद पूरे गांव में मचा कोहराम

Updated on: 06 December, 2019 07:03 AM

सोनभद्र के उभ्भा गांव में गुरुवार की शाम पौने पांच बजे जब तीन महिलाओं समेत दस ग्रामीणों के शव पहुंचे तो पूरे गांव में कोहराम मच गया। गांव के पूर्व प्रधान के दरवाजे पर बनी पंचायत में मौजूद महिलाओं का क्रंदन और रूदन वाहन से शवों के उतरने के साथ ही बढ़ता चला गया। एक समय तो ऐसा आया कि पूरे गांव में सिर्फ महिलाओं के जोर-जोर से रोने की आवाजें ही सुनाई दे रही थीं।

इस हृदय-विदारक दृश्य को देख कर वहां मौजूद कुछ पुलिस वालों के साथ ही साथ ग्रामीणों को सांत्वना देने आए नेताओं की आंखें भी भर आईं।शाम पौने पांच बजे भारी संख्या में फोर्स के साथ दसों शव गांव पहुंचे। पंचायत के नाम पर एक बरगद के पेड़ के नीचे जुटे ग्रामीणों के सामने जब शव वाला वाहन पहुंचा तो उससे पहले जो महिलाएं मुंह ढंक कर रो रही थीं, वह बदहवास सी हो गईं।

शवों को देख कर चीख-चीख कर रोने लगीं। जिनके पति और पिता मरे थे, वह तो बेसुध होकर गिर-गिर जा रही थीं। वहां खड़े गांव के कई पुरुष भी इस दृश्य को देख कर अपने आंसू नहीं रोक पाए और रो पड़े। गांव में कानून-व्यवस्था बनाने के लिए मौजूद जवानों में कुछ की आंखें भी नम हो गईं।पूरे गांव में मचे इस कोहराम के बीच भारी पुलिस बल के साये में किसी तरह शव को मगरहा नदी के किनारे दफनाने के लिए ले जाने की तैयारी की जाने लगी। जब शवों को वहां उठाया जाने लगा तो कुछ महिलाएं शवों के साथ लिपट कर रो पड़ीं। उन्हें नहीं ले जाने की जिद करने लगीं। किसी तरह उन्हें समझा-बुझा कर शवों को दफनाने के लिए ले जाया जा सका।

विवाद स्थल पर दफनाने को लेकर अड़े थे ग्रामीण
एक समय दस शव पहुंचने के पूर्व ग्रामीण शव को उभ्भा गांव में विवाद स्थल पर दफन करने पर अड़ गये थे। काफी समझाने-बुझाने के बाद किसी तरह ग्रामीण मगरहा नदी के किनारे दफन करने के लिए तैयार हुये। भकपा माले राज्य समिति के सदस्य सुधाकर यादव से इस दौरान पुलिस कर्मियों की बहस हुई। वो गांव में ग्रामीणों को तत्काल सहायता राशि,सरकारी नौकरी तथा जमीन पट्टा किये जाने की मांग पर अड़ गए थे। अपर पुलिस अधीक्षक अरूण कुमार दीक्षित के समझाने पर मामला शांत हुआ।

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