बरेली में है अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग की निशानी

Updated on: 18 November, 2019 02:43 AM

20 जुलाई 1969 को अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग चांद पर कदम रखने वाले पहले इंसान बने थे। आज इस घटना के 50 वर्ष पूरे हो रहे हैं। नील आर्मस्ट्रांग से जुड़ी एक खास याद बरेली में भी सुरक्षित है। वो है उनका ऑटोग्राफ युक्त फोटो। इसे पुराना शहर के इमैनुअल पेट्रेस ने अपने पास संरक्षित कर रखा है। मूल रूप से अजमेर के रहने वाले इमैनुअल पेट्रेस बरेली में रहकर वर्षों से चर्च का काम देख रहे हैं। पेट्रेस को नामी-गिरामी लोगों के पत्र और ऑटोग्राफ संकलित करने का शौक है। उनके पास इस तरह के दो हजार से ज्यादा ऑटोग्राफ और पत्र हैं। इनमें माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाले सर एडमंड हिलेरी का हस्ताक्षर किया हुआ पत्र भी शामिल है। उनके पास महारानी एलिजाबेथ, अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश, बिल क्लिंटन, पोप जॉन पॉल, टोनी ब्लेयर आदि के भी पत्र हैं। भारतीय राजनेताओं में उनके पास भारत रत्न राजीव गांधी, चंद्रशेखर, सोनिया गांधी, पूर्व राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा आदि के हस्ताक्षर युक्त पत्र हैं।

मेरे लिए अनमोल है यह ऑटोग्राफ

पेट्रेस बताते हैं कि 20 जुलाई को चांद पर नील आर्मस्ट्रांग को पहुंचे 50 वर्ष पूरे हो जाएंगे। यह अपने आप में एक ऐतिहासिक तारीख है। नील का पांच अगस्त को जन्मदिन होता है। मैंने उन्हें जन्मदिन पर मुबारकबाद भेजी थी। इसके जवाब में नील ने नासा से मुझे अपना हस्ताक्षरयुक्त फोटो भेजा। उस फोटो पर उन्होंने अपनी खूबसूरत राइटिंग में मेरा भी नाम लिखा है। पेट्रेस कहते हैं कि मेरे लिए यह बेशकीमती तोहफा है। हालांकि, नीलामी के बाजार में इसकी साढ़े तीन लाख रुपये तक कीमत लग चुकी है।

चंद्रयान-2 की सफलता को कर रहे प्रार्थना

पेट्रेस ने भारतीय वैज्ञानिकों को मिशन चंद्रयान-2 के लिए शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि 20 जुलाई को आर्मस्ट्रांग ने चांद पर कदम रखा था। 22 जुलाई को हमारा चंद्रयान-2 लांच होने जा रहा है। मैं इस अभियान की सफलता के लिए लगातार प्रार्थना कर रहा हूं। अजमेर में पले-बढ़े पेट्रेस ने अपने जीवन के छह वर्ष फिलीपींस में बिताए। वहां उन्होंने एक कपड़ा कंपनी में मैनेजर की जॉब की। वो यूएसए में भी रहे। धार्मिक झुकाव के चलते वो चर्च से जुड़ गए। अजमेर में उन्होंने अपने चर्च का 100 वर्षों का इतिहास भी लिखा था।

View More

24x7 HELP

Visitor
अब तक देखा गया