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एयरलिफ्ट कर देशभर से 8000 और सैनिकों को भेजा जा रहा कश्मीर, सेना और वायुसेना हाईअलर्ट पर

Updated on: 22 October, 2019 02:58 PM

केंद्र सरकार ने सोमवार को राज्यसभा में जम्मू एवं कश्मीर के पुनर्गठन का संकल्प पेश किया। गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को सदन में इसे पेश किया। इस विधेयक के अनुसार, जम्मू एवं कश्मीर को दो हिस्सों में बांट दिया जाएगा। इसमें जम्मू कश्मीर एक केंद्र शासित प्रदेश रहेगा, वहीं लद्दाख दूसरा केंद्र शासित प्रदेश होगा। इसके बाद 8 हजार और पैरामिलिट्री फोर्स को कश्मीर भेजा जा रहा है। वहीं भारतीय सेना और वायुसेना को हाईअलर्ट पर रखा गया है।

कश्मीर के लिए आठ हजार और पैरामिलिट्री फोर्स एयरलिफ्ट की गई है, यह फोर्स उत्तर प्रेदश, ओडिशा, असम और देश के अन्य हिस्सों से भेजी जा रही है। भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना को हाईअलर्ट पर रखा गया है।

सरकार ने बिल पेश करने से पहले जम्मू- कश्मीर में सुरक्षा बलों की 280 से अधिक कंपनियां तैनाती की थी। सुरक्षा बलों को शहर के अतिसंवेदनशील इलाकों तथा घाटी की अन्य जगहों पर तैनात किया गया। वहीं इससे पहले केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने बीते दिनों ही जम्मू कश्मीर में सीआरपीएफ की 50 कंपनियां, बीएसएफ की 10 कंपनियां, सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की 30 और आईटीबीपी की 10 कंपनियां तैनात की की थी।

सरकार ने सोमवार को राज्यसभा में एक ऐतिहासिक संकल्प पेश किया, जिसमें जम्मू कश्मीर राज्य से संविधान का अनुच्छेद 370 हटाने और राज्य का विभाजन जम्मू कश्मीर एवं लद्दाख के दो केंद्र शासित क्षेत्रों के रूप में करने का प्रस्ताव किया गया है। जम्मू कश्मीर केंद्र शासित क्षेत्र में अपनी विधायिका होगी जबकि लद्दाख बिना विधायी वाली केंद्रशासित क्षेत्र होगा। गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में एक संकल्प पेश किया जिसमें कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 370 के सभी खंड जम्मू कश्मीर में लागू नहीं होंगे।

शाह ने कहा कि विगत में 1950 और 1960 के दशकों में तत्कालीन कांग्रेस सरकारों ने इसी तरीके से अनुच्छेद 370 में संशोधन किया था। हमने भी यही तरीका अपनाया है। गृह मंत्री ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद स्वयं भी जम्मू कश्मीर से आते हैं, उन्हें चर्चा में भाग लेकर राज्य के लोगों की समस्याओं को उजागर करना चाहिए। शाह ने राज्यसभा में जम्मू एवं कश्मीर राज्य पुनर्गठन विधेयक 2019 पेश किया। गृह मंत्री अमित शाह ने लद्दाख के लिये केंद्र शासित प्रदेश के गठन की घोषणा की जहां चंडीगढ़ की तरह विधानसभा नहीं होगी।

शाह ने राज्यसभा में घोषणा की कि कश्मीर और जम्मू डिविजन विधानसभा के साथ एक अलग केंद्र शासित प्रदेश होगा जहां दिल्ली और पुडुचेरी की तरह विधानसभा होगी। गृह मंत्री ने कहा, '' राष्ट्रपति के अनुमोदन के बाद अनुच्छेद 370 के सभी खंड लागू नहीं होंगे। राज्यसभा में इस दौरान कांग्रेस समेत अधिकतर विपक्षी दलों ने विधेयक का विरोध करते हुए हंगामा किया और आसन के समक्ष धरने पर बैठ गये। हंगामे के दौरान ही पीडीपी के दो सदस्यों को सभापति एम वेंकैया नायडू के आदेश पर मार्शलों ने सदन से बाहर किया।

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