कैबिनेट की बैठक से पहले किसी मंत्री तक को नहीं लगी भनक

Updated on: 20 October, 2019 07:20 AM

केंद्र सरकार की एक बड़ी जीत के रूप में सोमवार को जम्मू एवं कश्मीर पुर्नगठन विधेयक 2019 राज्यसभा में पारित हो गया। जम्मू एवं कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा वापस लिए जाने और अनुच्छेद 370 को खत्म किए जाने को लेकर सरकार ने राज्यसभा में प्रस्ताव पेश किया, जिसे वह पास कराने में कामयाब रही। सूत्रों की माने तो इसकी किसी को भनक नहीं लगने दी गई। कानून मंत्री से सलाह मशविरा किया गया। चुनिंदा मंत्रियों को यह तो पता था कि इस बारे में बिल आना है, लेकिन कब यह नहीं बताया गया।

सूत्रों के अनुसार, रविवार की दोपहर के बाद से एक-एक कर कुछ नेताओं को इस कवायद से जोड़ा गया। सोमवार सुबह कैबिनेट में ही सभी मंत्रियों को इसका पता चल सका। इसके पहले शाह ने एनडीए के दो दलों के नेताओं से बात कर उनको भरोसे में लिया। कुछ दलों के नेताओं से प्रहलाद जोशी ने बात की। सुबह ही विपक्ष के दो और सांसदों के इस्तीफे तय हो गए।

सूत्रों के अनुसार, संसद सत्र शुरू होने के साथ ही पर्दे के पीछे तीन केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, पियूष गोयल और प्रहलाद जोशी की अहम भूमिका रही। खास बात यह रही कि अमित शाह खुद सोमवार को संसद में संकल्प व विधेयक को लाने से पहले राजग के सभी प्रमुख नेताओं को विश्वास में ले चुके थे, लेकिन सभी स्तर पर भारी गोपनीयता बरती गई।

खंगाले गए राज्यसभा के आंकड़े
सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार में शामिल होते ही शाह ने राज्यसभा के आंकड़े को खंगाला। विधानसभा के दलीय आंकडों के साथ यह भी देखा गया कि राज्यसभा में राजग व भाजपा का अपना बहुमत कब तक हो सकेगा? उसके पहले क्या क्या हो सकता है। सूत्रों के अनुसार विपक्षी दलों में कमजोर कड़ी खोजने और अपने साथ लाने के मोर्चे पर तीन केंद्रीय मंत्री, एक पार्टी पदाधिकारी जुटे। कमान शाह खुद संभाले थे। सोची समझी रणनीति के तहत आरटीआई व तीन तलाक विधेयक को पहले लाया गया।

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