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वाराणसीः फैक्ट्री के अंदर बिजली का शॉक देकर कर्मचारी की हत्या का आरोप

Updated on: 17 November, 2019 02:39 PM

यह बताया कारण कुतलुपुर स्थित फैक्ट्री में कर्मचारी धनंजय यादव को इलेक्ट्रिक शॉक देकर मारने का मामला सामने आया है। इस मामले में मृतक के भाई और हाईकोर्ट के अधिवक्ता सुरेंद्र यादव की तहरीर पर पुलिस ने फैक्ट्री के मालिक अशोक अग्रवाल व मैनेजर राजू वर्मा के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया है।

धनंजय यादव कुतलुपुर स्थित फैक्ट्री में वर्ष 2009 से कार्यरत था। पुलिस को दी गयी तहरीर में भाई सुरेंद्र यादव ने बताया की कंपनी के मालिक अशोक अग्रवाल व मैनेजर राजू वर्मा उसके भाई धनंजय से आये दिन शराब मंगवाने का दबाव बनाते थे।

इसके कारण भाई परेशान रहता था। मंगलवार की देर रात भी दोनों ने मेरे भाई से शराब मंगवाने का दबाव बनाया। जब भाई शराब नहीं लाया तो मालिक अशोक अग्रवाल व मैनेजर राजू वर्मा ने पहले मारापीटा। इसके बाद इलेक्ट्रिक शॉक देकर मार डाला। घटना के बाद दोनों फैक्ट्री से भाग निकले। स्थानीय लोगों ने धनंजय को लाल बहादुर शास्त्री चिकित्सालय ले आये जहां चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया।

इसके बाद लोगों ने परिवारवालों को सूचना दी। सूचना पर पहुंचे परिजनों ने शव को फैक्ट्री के बाहर रखकर हंगामा मचा दिया। कुछ देर बाद पहुंची पुलिस ने परिजनों को समझाकर किसी तरह शांत कराया। धनंजय मूलरूप से देवरिया जिले के बनकटा क्षेत्र के हरपुर गांव का निवासी था। वह फैक्ट्री के वर्कर कॉलोनी में रहता था। पति की लाश देख पत्नी सिंधु यादव बेहोश हो गई। उसका आठ वर्ष का बेटा आयुष है। थाना प्रभारी निरीक्षक अनूप शुक्ला ने बताया कि तहरीर के मुताबिक घटना की रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। पुलिस टीम आरोपितों की तलाश में दबिश दे रही है। शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही हत्या का कारण स्पष्ट हो सकेगा।

पांच भाइयों में छोटा था धनंजय वाराणसी। कुतुलपुर के फैक्ट्री के कर्मचारी धनंजय यादव के शव के साथ परिजन बीएचयू परिसर स्थित पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। उसके बड़े भाई रमाशंकर सेना के रिटायर जवान हैं। दूसरे भाई उमाशंकर यादव लंका थाने पर हेड कांस्टेबल हैं। तीसरे भाई सुरेंद्र यादव हाईकोर्ट के अधिवक्ता और चौथे भाई अजीत यादव लखनऊ में एडीजी जोन के चालक पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि धनंजय पांच भाइयों में सबसे छोटा था।

वह नौ साल से फैक्ट्री में काम करता था। फैक्ट्री का मालिक अशोक अग्रवाल और मैनेजर राजू वर्मा धनंजय को शराब लाने के लिए आएदिन प्रताड़ित करते थे। विरोध करने पर नौकरी के निकालने की धमकी और पिटाई की जाती थी।

घटना के बाद मैनेजर ने सुरेंद्र को फोन किया और भाई की चोट लगने और उसे लाल बहादुर अस्पताल में भर्ती कराने की जानकारी दी। कहाकि धनंजय की हालत गंभीर है। सूचना पर भाई पहुंचे तो देखा कि अस्पताल में कोई नहीं है।

धनंजय का शव अस्पताल के प्रवेश द्वार के पास पड़ा था। उसके सिर और शरीर पर गंभीर चोट के निशान थे। भाइयों का कहना था कि मेरे भाई की हत्या की गई।

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