फिर उफनाई घाघरा, खतरे के निशान से 24 सेमी ऊपर पहुंचा जलस्तर

Updated on: 19 November, 2019 06:46 AM

विगत कुछ दिनों से शांत चल रहा घाघरा का जलस्तर तेजी से बढ़ कर खतरे के निशान से 24 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है। नेपाल के पहाड़ी इलाकों में हो रही बरसात से बैराजों द्वारा घाघरा में छोड़ा जा रहा पानी बाढ़ क्षेत्र में तबाही मचाने को बेताब है। गोंडा जिल में एल्गिन चरसड़ी बांध के साथ निर्माणाधीन रिंगबांध से घाघरा का पानी अब टकराने लगा है। जिससे बाढ़ का खतरा बांध के साथ ही क्षेत्र के लिए बढ़ने लगा है।

तकरीबन एक सप्ताह से शांत चल रही घाघरा ने शुक्रवार भोर से दोबारा आंखें तरेरना शुरू कर दिया है। शुक्रवार की सुबह से एल्गिन ब्रिज पर घाघरा खतरे के निशान को पार कर चुकी थी। शाम होते होते नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर करीब 14 सेमी ऊपर आ गया। देर शाम तक नदी का जलस्तर बढ़ते क्रम में रहा। जिससे तटवर्ती इलाकों में दहसत का माहौल बना रहा। यही नहीं नदी में पानी का डिस्चार्ज शुक्रवार को 2 लाख 10 हजार 177 क्यूसेक बना रहा। जिससे आने वाले दिनों में जलस्तर में बढ़ोत्तरी की आशंका व्यक्त की जा रही है। तो वही फिर कटान की जद में बसे नकहरा, काशीपुर, बेहटा, चरपुरवा, परसावल, नैपुरा, बांसगांव गांव पर खतरा मंडराने लगा है। गांव वालों ने बताया कि पिछले 2 दिनों से लगातार चल रही कटान से नदी ने चरपुरवा, बेहटा, परसावल के पास से करीब सैकड़ों बीघे से अधिक कृषि योग्य भूमि काटकर धारा में समाहित कर लिया है।

घाघरा में बाढ़ का आलम यह है कि बेहटा से लेकर नैपुरा तक घाघरा नदी लगातार बांध से टकराने लगी है। बरसात की वजह से बांध पर आए रैंनकट्स की वजह से बांध भी कई जगहों पर कमजोर हो चुका है। घाघरा के इस रूख को देख ग्रामीणों में दहशत है और ग्रामीण एक बार फिर बाढ़ की चपेट में आने के लिए सशंकित हैं। बांध पर मौजूद नकहरा के लेखपाल ने बताया कि नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इधर अभी तक निर्माणाधीन रिंगबांध का काम भी पूरा नहीं हो सका है। ऐसी स्थिति में अगर जलस्तर में इजाफा होता है तो एक बार फिर से इलाके पर बाढ़ के बादल छा सकते है।

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