हिस्ट्रीशीटर की हत्या करने पहुंचे अपराधियों ने किशोर को गोली मारी

Updated on: 20 October, 2019 12:42 PM

वर्चस्व की जंग में हिस्ट्रीशीटर की हत्या करने आए चार अपराधियों ने गुरुवार की रात को सीरगोवर्धनपुर में 15 वर्षीय किशोर रैला उर्फ छोटू यादव के सीने में गोली मार दी। लोगों ने एक बदमाश को पकड़ लिया और पीटने के बाद पुलिस को सौंप दिया। तीन बदमाश भाग निकले। घायल को बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने मौके से एक कारतूस बरामद किया है। तनाव को देखते हुए मौके पर पीएसी तैनात कर दी गई है।

जानकारी के अनुसार सीरगोवर्धनपुर निवासी बदमाश सुरेश यादव, बल्लू, छैला, बड़ल्लू यादव गुरुवार की रात करीब नौ बजे हिस्ट्रीशीटर कल्लू यादव के घर पहुंचे। घर के बाहर अंडे की दुकान पर खड़े नौवीं के छात्र अतुल यादव से कल्लू के बारे में पूछने लगे। अतुल ने कल्लू के बारे में जानकारी नहीं होने की बात कही तो चारों उसे पीटने लगे। इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने विरोध किया तो सुरेश एक हाथ में तमंचा तो दूसरे में देसी पिस्टल से फायर करने लगा। पिस्टल से निकली एक गोली वहां खड़े किशोर छोटू यादव के सीने में लग गई। मौके का फायदा उठाकर तीन बदमाश भाग निकले। वहीं सुरेश को लोगों ने पकड़ कर पिटाई करने के बाद पुलिस को सौंप दिया। गोली चलने के बाद दुकाने बंद हो गई। लोगों का कहना था कि संयोग अच्छा था नहीं तो और लोगों को गोली लगती। एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह, सीओ भेलूपुर अनिल कुमार, इंस्पेक्टर भेलूपुर राजीव रंजन समेत कई थानों की फोर्स पहुंच गई। ग्रामीणों ने एसपी सिटी को बताया कि जेल से छूटने के बाद सुरेश रंगदारी लेता है। इसी को लेकर वह आए दिन लोगों को पीटता रहता है।

पुलिस पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप

घायल किशोर छोटू की हालत गंभीर बनी हुई है। उसका इलाज बीएचयू ट्रामा सेंटर में चल रहा है। छोटू के पिता घूरे यादव मजदूर हैं। उनका आरोप है कि आये दिन कल्लू यादव और सुरेश यादव गुट के अपराधी गांव में जुटते हैं और खुलेआम गुंडई करते हैं। इसकी शिकायत लंका पुलिस से करने पर भी कोई कार्रवाई नहीं होती। ग्रामीणों की पिटाई से घायल सुरेश को भी पुलिस ने पास के निजी अस्पताल में भर्ती कराया है। एसएसपी आनन्द कुलकर्णी ने ट्रामा सेंटर पहुंचकर घायल को देखा और पुलिस से जानकारी ली।

सात साल बाद जेल से छूटा था सुरेश

सीरगोवर्धनपुर निवासी अनिल यादव के बहनोई अजय यादव की जुलाई 2012 में दशाश्वमेध क्षेत्र में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मौके पर सुरेश पकड़ा गया था। उसके बाद से वह जेल में बंद था। सात वर्ष बाद जमानत पर वह छह महीने पहले ही जेल से बाहर आया था। इसके बाद सीरगोवर्धनपुर में दुकानदारों से वसूली व रंगदारी को लेकर कल्लू व सुरेश में वर्चस्व की जंग छिड़ गयी थी। इसको लेकर एक दिन पहले पंचायत भी हुई थी लेकिन बात नहीं बनी थी।

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