सुप्रीम कोर्ट ने महबूबा मुफ्ती की बेटी को मां से मिलने की इजाजत दी, रखी यह शर्त

Updated on: 22 November, 2019 04:58 PM

उच्चतम न्यायालय ने जम्मू कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा समाप्त किये जाने के बाद एक महीने से नजरबंद राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की बेटी को अपनी मां से मुलाकात करने की बृहस्पतिवार को इजाजत दे दी। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति ए एस बोबडे और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पीठ से पीडीपी प्रमुख की बेटी इल्तिजा ने कहा कि उसे श्रीनगर जाने में कोई दिक्कत नहीं है परंतु वह शहर में अपनी मर्जी से कहीं आ जा नहीं सकती।

इसके बाद पीठ ने इल्तिजा को श्रीनगर जाने और अपनी मां से मुलाकात करने की अनुमति प्रदान कर दी। लेकिन उसके श्रीनगर के दूसरे हिस्सों में जाने के बारे में न्यायालय ने कहा कि वह जिला प्रशासन से अनुमति मिलने पर ही ऐसा कर सकती है। अपनी याचिका में इल्तिजा ने कहा था कि वह अपनी मां की सेहत को लेकर चिंतित है क्योंकि एक महीने से उसकी मुलाकात अपनी मां से नहीं हुयी है।

इल्तिजा की ओर से याचिका दायर करने वाली अधिवक्ता नित्या रामकृष्णन जब अपनी दलीलें रख रहीं थी तभी अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल और सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि महबूबा की मां गुलशन आरा और बहन रूबैया सईद ने 29 अगस्त को उनसे मुलाकात की थी। जिला अधिकारी की अनुमति से उन्होंने दुबारा भी मुलाकात की थी।

सॉलिसीटर जनरल ने कहा कि इस याचिका का यह मकसद नहीं है बल्कि कुछ और ही है। कुछ मिनट की सुनवाई के बाद पीठ ने कहा कि इल्तिजा को श्रीनगर जाने और अपनी मां से मुलाकात की इजाजत दी जा सकती है क्योंकि इसमें कोई दिक्कत नहीं है। महबूबा को श्रीनगर में राजभवन के निकट चश्मेशाही के परिसर में नजरबंद रखा गया है।

इल्तिजा ने बुधवार को अपनी याचिका में कहा था कि वह अपनी मां के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं क्योंकि उनकी उनसे एक महीने से मुलाकात नहीं हुई है। जिसके बाद उनकी याचिका को बृहस्पतिवार को सुनवाई के लिए प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति एस ए बोबडे तथा न्यायमूर्ति एस ए नजीर की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया था।

उनकी ओर से पेश अधिवक्ता आकर्ष कामरा ने कहा कि याचिका में जिस तरह की राहत मांगी गई है, वह ठीक वैसी ही है जैसी कि माकपा महासचिव सीताराम येचुरी को 28 अगस्त को शीर्ष अदालत ने उनके बीमार पार्टी सहकर्मी मोहम्मद यूसुफ तारिगामी से मिलने के लिए दी थी।

पाबंदियों के एक महीने बाद, कश्मीर में तनावपूर्ण शांति, जम्मू व लद्दाख में हालात बेहतर
वहीं दूसरी ओर, कश्मीर में पाबंदियों को लागू हुए एक महीना पूरा हो गया है और घाटी में तनावपूर्ण शांति तथा अनिश्चितता की स्थिति अब भी बनी हुई है। वहीं चार अगस्त की आधी रात को संचार माध्यमों पर लगाए गए प्रतिबंधों और अन्य पाबंदियों में जम्मू और लद्दाख क्षेत्र में राहत दी गई है जहां अपेक्षाकृत हालात बेहतर हैं।

केंद्र सरकार ने पांच अगस्त को संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को हटा दिया था और जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया था। इसी फैसले के मद्देनजर संचार माध्यमों पर रोक लगा दी गई थी। राज्य प्रशासन कह रहा है कि उसने श्रीनगर और कश्मीर क्षेत्र के अन्य हिस्सों में दिन के वक्त लोगों की आवाजाही पर लगीं लगभग सभी पाबंदियों में ढील दे दी है लेकिन आम जन-जीवन अब भी प्रभावित है और दुकानें बंद हैं और छात्र शैक्षिक संस्थानों से दूर हैं।

जम्मू और लद्दाख में लैंडलाइन फोन की सेवा और कुछ हक तक मोबाइल सेवा की बहाली के बाद हालात अपेक्षाकृत बेहतर हैं। घाटी के विपरीत, इन दो क्षेत्रों में दुकानें, स्कूल और व्यापारिक प्रतिष्ठान खुले हैं। घाटी में संदिग्ध पोस्टर लगाए गए हैं जो 'असैन्य कर्फ्यू की बात करते हैं और लोगों से 'सविनय अवज्ञा' करने को कहते है। पिछले हफ्ते अपनी दुकान खोलने वाले एक व्यक्ति की आतंकवादियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी जिसके बाद लोगों में डर भी है।

भाजपा को छोड़ विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के करीब 60 शीर्ष नेताओं को घरों, गेस्टहाउस और होटलों में हिरासत में रखा गया है। कुछ को राज्य और राज्य की बाहर की जेलों में भी रखा गया है। माना जाता है कि 400 राजनीतिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया है।

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