Happy Teachers Day 2019: गुरुजन अपने संसाधनों से बदल रहे स्कूलों की तस्वीर

Updated on: 19 November, 2019 06:47 AM

गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पांय... बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय। जी हां, हर शिष्य के लिए गुरु का महत्व होता है। राजधानी में कई गुरु ऐसे हैं जिन्होंने अपने शिष्यों का भविष्य संवारने के लिए बहुत परिश्रम किया है। इन गुरुओं के पढ़ाने का तरीका लाजवाब है। यही नहीं, कई शिक्षक तो छात्र-छात्राओं का भविष्य संवारने के लिए अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा भी खर्च कर रहे हैं। शिक्षक दिवस पर ऐसे गुरुजनों पर पेश है रिपोर्ट।

प्रिंसिपल के प्रयास से चमका स्कूल

लखनऊ मॉन्टेसरी इंटर कॉलेज, सदर

बीती एक अप्रैल को स्कूल के शिक्षक प्रशांत मिश्र ने प्रिंसिपल पद की जिम्मेदारी संभाली। बजट न होने पर उन्होंने अपने वेतन से स्कूल की तस्वीर बदलने की मुहिम छेड़ दी। मैदान से लेकर क्लासरूम तक में काम कराया गया। जुलाई में डीएम कौशल राज शर्मा और जिला विद्यालय निरीक्षक ने इस स्कूल को गोद लेने की घोषणा की। प्रिंसिपल प्रशांत मिश्र कहते हैं कि इस स्कूल को प्रदेश के सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के लिए आदर्श स्वरूप देना उनका सपना है। मैं अपना सपना पूरा करने के लिए हर संभव कोशिश करूंगा।

शिक्षकों ने स्कूल बचाने के लिए कसी कमर

लखनऊ इंटरमीडिएट कॉलेज
दिसम्बर 2018 में इस स्कूल को बंद करने का प्रयास किया गया। उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा के हस्तक्षेप के बाद स्कूल बच सका था। प्रिंसिपल रजनी यादव और उनकी टीम शिक्षक विश्वजीत सिंह, शिव कुमार वर्मा, राम चन्द्र द्विवेदी , ओम प्रकाश अवस्थी, गजेन्द्र यादव, रीना पाल, स्कूल को गुणवत्तापूर्ण ढंग से संचालित करने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है। शिक्षकों के प्रयास का असर दिख भी रहा है। स्कूल में लिखने के लिए चॉक से लेकर सफाई की झाडू तक, तमाम चीजें अपने संसाधनों से शिक्षक खुद खरीदते हैं। बच्चों के लिए स्कूल आने-जाने के लिए वाहन का खर्च भी खुद उठा रहे हैं।

सरकारी स्कूल बना मिसाल, नवाचार से सीख रहे बच्चे

प्राथमिक विद्यालय गडेरियनपुरवा को यहां की शिक्षिकाओं ने खास स्कूल बना दिया है। यहां पर बच्चों को नवाचार के जरिए पढ़ाया जाता है। उनको सामाजिक कार्यों से भी जोड़ा जाता है। जिले में सबसे अधिक बच्चों का नामांकन (करीब 260) इसी स्कूल में है। शिक्षिका इंचार्ज लवी सिंह बताती है कि बच्चों को अंकुरित बीज के बारे में पढ़ाते समय हम बच्चों को बीज व उसके अकुरित होने की प्रक्रिया लाइव दिखाते हैं। बच्चों के लिए कम्प्यूटर और पुस्तकालय है। पुस्तकालय में शिक्षिकाओं ने किताबें उपलब्ध कराई है। निजी स्कूलों की तरह मेज-कुर्सी समेत कई सुविधाएं हैं। यहां पर समाजिक कार्यों से बच्चों को जोड़ने के लिए बुलबुल कार्यक्रम चलाया जा रहा है।

पढ़ाने की शैली है खास

केजीएमयू शिक्षकों में डॉ. आरके दीक्षित, एक ऐसी शख्सियत हैं, जिनकी 95 फीसदी क्लास फुल रहती हैं। कई बार उनकी क्लास में सीनियर व जूनियर छात्र भी ज्ञान बढ़ाने आ जाते हैं। डॉ. दीक्षित फार्माकोलॉजी विभाग में तैनात हैं। वह एमबीबीएस व एमडी के छात्रों को पढ़ाते हैं। वह बताते हैं कि यहां सभी वर्ग के छात्र दाखिला लेते हैं। मेडिकल की किताबें अंग्रेजी में होती हैं। बहुत से छात्रों को अंग्रेजी समझ में नहीं आती है। ऐसे में वे हिन्दी व अंग्रेजी को मिलाकर पढ़ाते हैं। करीब 25 साल पहले शिक्षक पद पर तैनाती हुई। उन्होंने पढ़ाने का फार्मूला तैयार किया। वे छात्रों को दिलचस्प अंदाज में पढ़ाते हैं।

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